यौं रहीम कैसे निभै, बेरे-केर कौ संग। वो डोलत रस आपनै, उनके फाटत अंग॥ साहित्य अगर बेर का वृक्ष है तो ब्लॉग केले का वृक्ष। ……………………………… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 5 months ago: यौं रहीम कैसे निभै, बेरे-केर कौ संग। वो डोलत रस आपनै, उनके फाटत अंग॥ साहित्य अगर बेर का वृक्ष है तो … more →