ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जाने है हो न जाऊं कहीं मै मग़रूर थाम लो जो दिलों को दिलों से करता है अलग तुम ज़माने का वो इक दस्तूर थाम … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आओ कुछ ख़ामोशी सुन लो लब्ज़ों में सन्नाटे बुन लो बिखर रहे हैं अक्स के टुकड़े टुकड़ों में ख़ामोशी चुन लो अ … more →