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Blogs about: वाइज़

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सहर-ब-सहर मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ9 comments

विनय wrote 8 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, असरकार, घर, चारागर, ठिकाना, तन्हाई, दर्द, दामन, दुआ

यह सोज़गाह है कि मेरा दिल है8 comments

विनय wrote 9 months ago: यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नह … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, अस्लूब, जाहिल, दिल, दुनिया, पारसा, पुरनम, बातिल, माहे-क़ातिल

ख़लिश को जगह न दो दिल में2 comments

विनय wrote 1 year ago: ख़लिश को जगह न दो दिल में नासूर बन जायेगी मरहम भी न लगा पाओगे साँस घुट के मर जायेगी ज़ीस्त अलग है, ज़ी … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, साँस, मरहम

वो जिसे इश्क़ कहता था

विनय wrote 2 years ago: वो जिसे इश्क़ कहता था वाइज़1 हम उसमें फँस गये बहाये इतने आँसू कि जहाँ खड़े थे वहीं धँस गये न जिगर से ल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, Reminisce, दिल, बादल, नसीब, ख़्याल


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