कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ कहानियाँ कहती हों वादियाँ हर लम्हा रोशन हो प्यार से जिसको चाहें उसका दीदार मिले कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रsushilgirdher wrote 1 year ago: ए जालिम वफा न सही बेवफाई तो निभा पिला दे जहर मगर प्यार से पिला। साथ ताउम्र न दो तो कोइ शिकवा नहीं पर … more →
विनय wrote 1 year ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ कहानियाँ कहती हों व … more →
विनय wrote 1 year ago: मीठी-मीठी बातें वह शबनमी रातें सब याद हैं हमें वह रस्ते वह रिश्ते जो हमने क़ायम किये थे वादे जो हमने … more →