भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई? काहे को भगवान बनाया? अगर मैं आज यहाँ नही होता, तो मेरी जगह पे वह बैठा रहता । तुम लोग यह बात समझ नही पाओगे । वो मेरा दोस्त ही नही, मेरा सबसे बड़ा प्रतिद्वन्द्वी… more →
ठेले पे हिमालयGaizabonts wrote 1 year ago: भगवान बनाने वाले, क्या तेरे मन में समाई? काहे को भगवान बनाया? अगर मैं आज यहाँ नही होता, तो मेरी जगह … more →
Gaizabonts wrote 1 year ago: वो कुछ लोग है, कुछ यादें है वो कुछ लमहें है, कुछ साल है। इस दिन, हर साल यहीं हमारी अकेले में बातचीत … more →
Gaizabonts wrote 2 years ago: नहीं, नहीं, आप नहीं मैं ही कुछ बदल सा गया हूँ। जिस राह पर हम साथ चल रहे थे उस राह से थोडा भटक गया हू … more →
Gaizabonts wrote 2 years ago: तुम्हारे नाम, न जाने कितने शब्द कटें, मरें। हर इच्छा का अंतिम संस्कार कर आया हूँ, हर खुशी को अग्नि द … more →
Gaizabonts wrote 2 years ago: वहाँ ३॰॰ हो चुके – यहाँ बस इकतीस। अब तक तो सेन्चुरी भी नही हुई यहाँ, बात कर रहे हैं तीन … more →
Gaizabonts wrote 3 years ago: कुछ ऐसे अनोखे भाव कभी बोल कर भी व्यक्त नहीं होते शब्दों की गाड़ी उनके भाग्य में नहीं होती सबसे चहेते … more →
Gaizabonts wrote 3 years ago: एक जीवन ऐसा ही है आपके द्वार के आगे खटखटाते रह गये आप आयें न पिया आप तो बना गये अपनी ही नियम यहाँ मे … more →
Gaizabonts wrote 3 years ago: आप जानते है, यहाँ आपके बहुत निष्ठावान प्रशंसक है। -उन्हें मित्र कहें, प्रशंसक नहीं। छोडिये, अब अधिक … more →