ठंड हो गयी है. फिर से सर्दियों का मौसम आ गया. गर्म कमरे से बाहर निकलते ही तुम्हारी यादें नश्तर की तरह हड्डियों में समाने लगती हैं. थोड़ा असर शायद हवाओं में भी होगा. लेकिन यह मौसम वैसा नहीं है मेरी ठंडी… more →
वाणीvikash wrote 1 year ago: ठंड हो गयी है. फिर से सर्दियों का मौसम आ गया. गर्म कमरे से बाहर निकलते ही तुम्हारी यादें नश्तर की तर … more →