न मिली थी माँ की थपकियां और अब खो दी प्रेमिका की स्मित मुस्कान तो चल पड़ा वह आकांक्षा लिये विश्वविजय की पत्थर सी जड़ आंखों में एक सपना दबाये जिसमें मंद झकोंरों से गुजरी किरण किरण चंचल नयनो में प्रतिब… more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: न मिली थी माँ की थपकियां और अब खो दी प्रेमिका की स्मित मुस्कान तो चल पड़ा वह आकांक्षा लिये विश्वविजय … more →
Tags: अतुकांत, हिन्द-युग्म, प्रतिशोध, कुंठा, आतंकवादी
Follow this tag via RSS