वह जो सभी तरफ दिखाया जा रहा है उसका मुख्य उद्देश्य तुम्हें भीड़ बनाना है। वह भीड़ जो समय पड़े तो उसे जाति, भाषा,धर्म और क्षेत्र के आधार पर बांटा जा सके। इसे बांटकर उन लोगों के सामने प्रस्तुत किया जा सके … more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकाseedheebaat wrote 1 week ago: धरती की गोद में फिर एक कोंपल निकलना चाहता है उसे नहीं मालूम कि कई घने पेड़ उसे धूप तक मयस्सर नहीं हो … more →
seedheebaat wrote 2 weeks ago: तकनीक ने हमारी ज़िंदगी को बहुत आसान बना दिया है, लेकिन इसके दुरुपयोग ने मानो जीना मुहाल कर दिया है। … more →
seedheebaat wrote 2 weeks ago: आम दिनों की तरह मेरी नींद आज भी देर से खुली और हर रोज की तरह अधखुली पलकों से कमरे के बाहर पड़ा अख़बा … more →
seedheebaat wrote 1 month ago: जाने कब से ये कसमसाहट सी थी… लेकिन येनकेन वजहों से भड़ास दिल में ही दबी रह जाती थी… और फ … more →
उन्मुक्त wrote 1 month ago: मैंने कुछ समय पहले बचपन में पढ़ी आर्ची कॉमिक्स के बारे में ‘हाय, यह क्या किया – मेरा दिल ही टू … more →
उन्मुक्त wrote 3 months ago: शैरन केलर (Sharon Keller) सबसे पहले १९९४ में टेक्साज़ अपीली न्यायालय की न्यायाधीश चुनी गयी थीं। वे इ … more →
Gaizabonts wrote 4 months ago: किसी एक की मौत किसी दुसरे की ज़िन्दगी बदल देती है, एक जिंदा लाश उस मौत का मतलब समझने में, आस-पास के … more →
उन्मुक्त wrote 5 months ago: किशोरावस्था में कदम रखते रखते मैंने, शायद हम सब ने, आर्ची कॉमिक्स पढ़ना शुरु कर दिया। कॉमिक्स पढ़ने … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वह जो सभी तरफ दिखाया जा रहा है उसका मुख्य उद्देश्य तुम्हें भीड़ बनाना है। वह भीड़ जो समय पड़े तो उसे जा … more →
उन्मुक्त wrote 6 months ago: ‘पुरुषों की ब्रीफ तो लम्बी हो सकती है पर महिलाओं की स्कर्ट ब्रीफ नहीं हो सकती। नेकटाई मर्यादित … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: संत कबीर महाराज कहते हैं कि ———————– कबीर तो सांचै म … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: उस दिन उस लेखक मित्र से मेरी मुलाकात हो गयी जो कभी कभी मित्र मंडली में मिल जाता है और अनावश्यक रूप व … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कबीर तो सांचै मतै, सहै जू सनमुख वार कायर अनी चुभाय के, पीछे झखै अपार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: एक मित्र ब्लाग लेखक सुरेश चिपलूनकर ने कल कुछ फोटो बनारस शहर और गंगा नदी के भेजे। वह हिंदी ब्लागजगत क … more →
उन्मुक्त wrote 9 months ago: कुछ समय पहले, मैथली गुप्त जी ने, कैफे हिन्दी नामक एक वेबसाइट शुरू की। मैं न तो मैथली जी को, न ही इस … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: स्वतंत्रता के बाद देश का बौद्धिक वर्ग दो भागों में बंट गया हैं। एक तो वह जो प्रगतिशील है दूसरा वह जो … more →
उन्मुक्त wrote 9 months ago: ‘मुझे मिलना उस मोड़ पर, जहां केवल हम दोनो हों वो मोड़ ऐसा हो, जहां से मैं, न पीछे हट सकूं, और … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: हम अक्सर अपने संस्कार और संस्कृति के संपन्न होने की बात करते हैं। कई बार आधुनिकता से अपने संस्कार और … more →
उन्मुक्त wrote 10 months ago: मैंने अपने इसी चिट्ठे पर दो चिट्ठियां ‘मुक्त मानक और अमेरिकी चुनाव‘ और ‘क्या ओबाम … more →