अच्छत धरती अच्छत धरती तोड़ रहा हूं ठाड़ी खरपतवार घनेरी उसी-उसी को गोड़ रहा हूं सुनो,सुनो – क्यों तुम चौंको भेड़ धसानी मोड़ रहा हूं जिसका होता बड़ा कलेजा वो ही मिनख लौह गलाता जो चलता गढ़ लीकों भारी … more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 2 years ago: अच्छत धरती अच्छत धरती तोड़ रहा हूं ठाड़ी खरपतवार घनेरी उसी-उसी को गोड़ रहा हूं सुनो,सुनो – क्यो … more →