विद्रोह से पहले तक कितना कुछ सहा गया . अपने ही हाथो अपनी उम्मीदों का गला घोटा गया. विद्रोह से पहले तक मैं पराजित था. साहस नही था कि अन्याय के विरुद्ध नजरे उथाकर देख सकू. फ़िर विद्रोह का जन्म हुआ.और अब … more →
हरकाराSatish Chandra satyarthi wrote 8 months ago: धूमिल की यह कविता कुछ वर्षों पहले भी पढी थी पर उस वक्त कुछ ख़ास अनुभूति नहीं हुई थी। शायद इस कविता क … more →
Praful wrote 9 months ago: बांग्लादेश राइफ़ल्स की ज़िम्मेदारी देश की सीमाओं की हिफ़ाज़त करने की है बांग्लादेश की राजधानी ढाका म … more →
Hemant Patel wrote 2 years ago: विद्रोह से पहले तक कितना कुछ सहा गया . अपने ही हाथो अपनी उम्मीदों का गला घोटा गया. विद्रोह से पहले त … more →