चंचल आंखों की पीड़ा से छलक रहा क्यों जाम आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम कैसे बच पायेगा पंखी ठगी हुई सी आंखें छाया विष हलाहल नभ में उड़ती दोनो पांखें गले तीर के लग जाने के कैसे ये अरमान चीर कल… more →
हरिहर झाshabarmantra wrote 10 months ago: “सिद्ध वशीकरण मन्त्र” पोस्ट पर एक सज्जन की टिप्पणी प्राप्त हुई, pandit ji main , apni pr … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: चंचल आंखों की पीड़ा से छलक रहा क्यों जाम आंखों से आंसू बहते हैं मधुशाला के नाम कैसे बच पायेगा पंख … more →