नैन मिलाकर मोहन सौ,वृषभानु लली मन में मुस्कान। भौंह मरोर के दूसरी और,कछु वह घूंघट में शरमाई। देखि निहाल भई सजनी,व सूरतिया मम माँहि समानी। औरन की परवाह नही,अपनी ठकुराइन राधिका रानी॥ नवनीत गुलाब तैं कोम… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 5 months ago: नैन मिलाकर मोहन सौ,वृषभानु लली मन में मुस्कान। भौंह मरोर के दूसरी और,कछु वह घूंघट में शरमाई। देखि नि … more →
pushtimarg wrote 5 months ago: मेरी छैल छबीली राधे,मेरे छैल छबीले श्याम। मेरी रसिक रंगीली राधे,मेरे रसिक रंगीले श्याम। मेरी गुन गर् … more →
pushtimarg wrote 5 months ago: परिकम्मा को या विधि दीजै । रुक रुक ध्यान करो गिरिवर को,वार वार सिर दीजै । सुमरत नाम मगन मन चलिये,परम … more →
pushtimarg wrote 5 months ago: तुम मेरे थे मेरे हो मेरे ही रहोगे, बहकूँ न अब बहकाने से। जब समझ प्रेम में डूब गई, तब क्या होगा समझान … more →