नववर्ष की पूर्व संध्या पर फंदेबाज अग्रिम बधाई देने घर आया और बोला ‘‘दीपक बापू, इधर कई बरसों से सांताक्लाज का नाम बहुत सुनने में आया हालत यह हो गयी सभी हिंदी के सारे टीवी चैनल और पत्र-पत्रिकाओं में यह … more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****Nishant wrote 1 week ago: ईसप की छोटी-छोटी कहानियां महान सत्यों से हमारा परिचय करातीं हैं. हम सभी ने ईसप की वह कहानी पढ़ी है ज … more →
प्रदीप wrote 5 months ago: मुझे तब बहुत प्रसन्नता होती है जब हम भारतीय किसी मुद्दे की गम्भीरता को समझते हुए उस पर सार्थक बहस कर … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: नववर्ष की पूर्व संध्या पर फंदेबाज अग्रिम बधाई देने घर आया और बोला ‘‘दीपक बापू, इधर कई बरसों से सांता … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वन … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो खलन … more →
shaifaly wrote 11 months ago: समय की विपरित धारा में जैसे कृष्ण ने पूरा पर्वत अपनी एक उँगली पर उठा रखा था, मुझे लगता है मैंने भी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मैने एक अंग्रेजी ब्लाग पर पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिये’ के बारे में चर्चा पढ़ी। अंग्रेजी से हिं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १।किसी भी कार्य करने से पहले यह देखना चाहिए की उसका प्रतिफल क्या मिलेगा? यदि प्राप्त लाभ से अधिक परि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शब्द कभी स्वयं कभी बीभत्स नहीं होते डरा देते हैं उनके भाव, अगर कोई बोले रोते . जो ख्वाहिशों वास्त … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लोगरों के वर्गीकरण को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. इसका वैसे कोई आधिकारिक वर्गीकरण नहीं हुआ है, प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंस ते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल तौ काहे कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिसके प्रति सच्चा प्रेम हैं वह दूर रहते हुए भी समीप रहता है। इसके विपरीत जिससे लगाव नही … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1. हजारों गायों की बीच जिस तरह बछड़ा अपनी मा के पास जाता है वैसे ही मनुष्य का कर्म भी उसी में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं प्रेम कोटि क्रम सिरि ते चल्या, चेत न देखै भ्रम संत … more →