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Blogs about: विश्वास

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रौशनी और अंधेरे की जंग-लघुकथा (roshni aur andher ke jang-hindi laghu katha)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: वैसे तो उन सज्जन की कोई इतनी अधिक उम्र नहीं थी कि दृष्टिदोष अधिक हो अलबत्ता चश्मा जरूर लगा हुआ था। ए … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, कला, कहानी

अहसास

Hemant Patel wrote 1 month ago: तुम हो ही नही तुम्हारे होने का अहसास है और यहा अभी इस पल इस खुरदुरे पन्ने से निकलकर अहसास से विश्वास … more →

Tags: कविता, साहित्य, अहसास

आस्था और विश्वास11 comments

Nishant wrote 1 month ago: पर्वतारोहियों का एक दल एक अजेय पर्वत पर विजय पाने के लिए निकला. उनमें एक अतिउत्साही पर्वतारोही भी था … more →

Tags: अन्य कथाएँ, आस्था, समर्पण

वाचा - Covenant

the3rdone wrote 2 months ago: वाचा बांधने के लिए दो जन का ज़रुरी है. एक आदमी दुसरा आदमी के साथ वाचा बांधता है और एक दुसरे को कुछ श … more →

Tags: beginners, God, Jesus, Spirit, life, मुक्ति और उद्धार, यीशु, पश्चाताप, मुक्ति, जीवन, मार्गदर्शन

ईसप की कहानी : विश्वसनीयता बनाये रखें

Nishant wrote 5 months ago: ईसप की छोटी-छोटी कहानियां महान सत्यों से हमारा परिचय करातीं हैं. हम सभी ने ईसप की वह कहानी पढ़ी है ज … more →

Tags: ईसप की कहानियां, झूठ

"स्लमडॉग" के बहाने5 comments

प्रदीप wrote 10 months ago: मुझे तब बहुत प्रसन्नता होती है जब हम भारतीय किसी मुद्दे की गम्भीरता को समझते हुए उस पर सार्थक बहस कर … more →

Tags: गम्भीरता, झुग्गी का कुत्ता, परिणाम, प्रयोगशाला, भारतीय, मुद्दे की गम्भीरता, सार्थक, स्लमडॉग, स्लमडॉग मिलियनेयर

यह बाजार के विज्ञापन का खेल-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: नववर्ष की पूर्व संध्या पर फंदेबाज अग्रिम बधाई देने घर आया और बोला ‘‘दीपक बापू, इधर कई बरसों से सांता … more →

Tags: Blogroll, inglish, Dashboard, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Internet, क्षणिका, Family

हिन्दी, हिन्दू और हिंदुत्व:नए सन्दर्भों में चर्चा (१)

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिन्दी,हिन्दू और हिंदुत्व शब्दों में जो आकर्षण है उसका कारण कोई उनकी कानों को सुनाई देने वाली ध्वनि … more →

Tags: हिन्दी, समाज, dharm, धर्म, hindi, प्रचार, hindu, ज्ञान, अध्यात्म

शब्द हमेशा अंतरिक्ष में लहराते-हिंदी कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो खलन … more →

Tags: व्यंग्य, Sahitya, सन्देश, साहित्य, अनुभूति, शायरी, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya

छूके जइयो हमारी बगीची, मैं पीपल के आड़े मिलूँगी

shaifaly wrote 1 year ago: समय की विपरित धारा में जैसे कृष्ण ने पूरा पर्वत अपनी एक उँगली पर उठा रखा था, मुझे लगता है मैंने भी अ … more →

Tags: गुलज़ार की चोर, शैफाली, Add new tag, पीपल, shaifaly

कम दर्शकों द्वारा फिल्म देखने की शिकायत बेमानी-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मैने एक अंग्रेजी ब्लाग पर पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिये’ के बारे में चर्चा पढ़ी। अंग्रेजी से हिं … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, Thought, संपादकीय, India, bharat, अनुभूति, हिंदी साहित्य

चाणक्य नीति:भगवान् की कृपा हो तो तीनों लोक घर समान 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १।किसी भी कार्य करने से पहले यह देखना चाहिए की उसका प्रतिफल क्या मिलेगा? यदि प्राप्त लाभ से अधिक परि … more →

Tags: भारत, bharat, साहित्य, Education, freinds, Blogging, arebic, शब्द, web duniya

सुन्दर शब्द का सृजन, सबके नसीब नहीं होते3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शब्द कभी स्वयं कभी बीभत्स नहीं होते डरा देते हैं उनके भाव, अगर कोई बोले रोते . जो ख्वाहिशों वास्ते क … more →

Tags: writing, संस्कार, कविता, अभिव्यक्ति, चिन्तन, Shayri, शेर, आलेख, साहित्य

ब्लोग लेखक और लेखक ब्लोगर

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: ब्लोगरों के वर्गीकरण को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. इसका वैसे कोई आधिकारिक वर्गीकरण नहीं हुआ है, प … more →

Tags: writing, धर्म, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, बिंब-प्रतिबिंब, अनुभूति, आलेख, साहित्य

संत कबीर वाणी:ज्ञानी कोरी मान्यताओं में नहीं फंसते

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंस ते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं क … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, Dashboard, Thought, dharam, बिंब-प्रतिबिंब, आलेख, साहित्य

रहीम के दोहे:बुरे वक्त में राम का नाम ही सहायक1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल तौ काहे  कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीकृष … more →

Tags: aastha, aducation, arebic, दीपक भारतदीप, रहीम, विचार, शिक्षा, समाज, साहित्य

चाणक्य नीति:विद्या की शोभा उसकी सिद्धि 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1.जिसके प्रति सच्चा प्रेम हैं वह दूर रहते हुए भी समीप रहता है। इसके विपरीत जिससे लगाव नहीं है वह आदम … more →

Tags: Blogroll, bharat, सूचना, बिंब-प्रतिबिंब, चिन्तन, साहित्य, Bloging, Art, Blogger

चाणक्य नीति:अन्न,जल और प्रिय वचन हैं असली रत्न 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1. हजारों गायों की बीच जिस तरह बछड़ा अपनी मा के पास जाता है वैसे ही मनुष्य का कर्म भी उसी में पाया जा … more →

Tags: hindi, Global Dashboard, inglish, विचार, अभिव्यक्ति, लम्हे, India, bharat, चिन्तन

कबीर वाणी:उसी धन का संचय करो जो आगे काम आये

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं प्रेम कोटि क्रम सिरि ते चल्या, चेत न देखै भ्रम संत शि … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, Dashboard, Global Dashboard, Thought, dharam, inglish, India, bhaarat


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