विष्णुचंद्र शर्मा की एक कविता सभ्यता का ज़हर सुबह की भाषा में कोई प्रदूषण नहीं है सुबह की हवा पेड़ों को बजा रही है सुबह की भाषा में ताज़े पेड़ पहाड़ों से तराना सीख रहे हैं सुबह यहां कोकाकोला क… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 2 years ago: विष्णुचंद्र शर्मा की एक कविता सभ्यता का ज़हर सुबह की भाषा में कोई प्रदूषण नहीं है सुबह की हव … more →