परमाल रासो – इस ग्रन्थ की मूल प्रति कहीं नहीं मिलती। इसके रचयिता के बारे में भी विवाद है। पर इसका रचयिता “”महोबा खण्ड” को सं. १९७६ वि. में डॉ. श्यामसुन्दर दास ने “”… more →
हिन्दी साहित्यसंपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: परमाल रासो – इस ग्रन्थ की मूल प्रति कहीं नहीं मिलती। इसके रचयिता के बारे में भी विवाद है। पर इ … more →