क्यों बने हुए हो दीन-हीन, क्यों मायूसी तुम पे छाई, क्यों देख के यूँ डर जाते हो, ख़ुद अपनी ही परछाई| क्या भूल गए कि कौन हो तुम , या भूले अपने अंतर को, तुम उस पूर्वज के वंसज हो, जो पी गए सारे समन्दर को| … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: क्यों बने हुए हो दीन-हीन, क्यों मायूसी तुम पे छाई, क्यों देख के यूँ डर जाते हो, ख़ुद अपनी ही परछाई| क … more →
Tags: Kavita, Shubhashish, कला, शेर, कविता, शुभाशीष, मुक्तक, जागो, हास्य
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