ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा ख़ुशी न सही दर्द ही अपनाये मुझको मेरा वुजूद कुछ नहीं है यार के बिना उससे मसीहा कोई मिलाये मुझको जवानी में… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा ख़ुशी … more →