Esha – एक संस्था है जो कि नेत्रहीनों के लिये काम कर रही है। यह संस्था कई तरीकों से नेत्रहीनों की सहायता कर रही है। यहां विजिटिंग कार्ड्स पर ब्रेल में नाम लिख नेत्रहीनों को आत्मनिर्भर बनाने का क… more →
आईनाजगदीश भाटिया wrote 1 year ago: Esha – एक संस्था है जो कि नेत्रहीनों के लिये काम कर रही है। यह संस्था कई तरीकों से नेत्रहीनों … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: आप लोग सोचते होंगे कि दिल्ली के लोग कैसे इतने खौफ में जीते होंगे। एक तरफ लाल चेहरे वाले बंदरों का आत … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: अमृता प्रीतम का उपन्यास ’पिंजर’ मैंने तब पढ़ा था पहली बार जब में स्कूल में ही था। उसके बाद जाने कित … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: बंटवारे के दो तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि इखलाकी क़ैदियों की तरह … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: आज जीतू भाई से दिल्ली में मिलने से पहले मैं अपना आयकर रिटर्न जमा करवाने ITO गया। कई सालों से देख र … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: मेरे दोस्त राजेश रोशन ने लिखा कि कैसे उनकी एक पोस्ट पर एक ही दिन में 221 हिट्स मिले। ऐसा ही एक बार म … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: परसों जब अपने नये चिट्ठे मजेदार समाचार के लिये कुछ मजेदार समाचार खोज रहा था तो एक समाचार पर नजर पड़ी … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: कल पार्किंग में गाड़ी खड़ी करके ऑफिस की ओर जाने लगा तो एक युवक टकरा गया। “माफ करें सर! आपसे दो … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: मार्च का महीना हमारे लिये बहुत ही व्यस्ततम महीना होता है। मैंने फैसला किया था कि मार्च में कोई पोस्ट … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: रचना जी ने जब पांच सवाल पूछे तो मैंने चुटकी ली थी कि “आपको मौका मिला था तो कुछ निजी पोल पट्ट … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: (नीरज भाई तथा अनूप भाई की फरमाईश पर एक बार फिर पेश है मुन्ना सरकिट संवाद। जैसा कि आप सब को मालूम हो … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: जिस दिन से हिंदी याहू शुरू हुआ, मेरा होमपेज बन गया। शुरू से ही साईट पर हिंदी में पढ़ने को इतना कुछ … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: केमिकल लोचा- संदर्भ :- गांधीगिरी कुछ दिन से ढंग से मैं सो नहीं पाया रात बदली करवट तो बापू को पाया … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: अनूप जी ने एक बार चिट्ठाचर्चा में लिखा था सबेरे से बांचते रहे अखबार चवन्नी भर सरक गया इतवार आप सब क … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: शशि भाई और बुल्लेशाह ने जब काबुल एक्सप्रैस के बारे में लिखा तो स्वंय को फिल्म देखने से रोक नहीं पाया … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: आज के समाचरपत्रों में मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडी … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: आपको याद है दूरदर्शन का वो जमाना जब चित्रहार में हीरो और हिरोईन नजदीक आते (नहीं नहीं आने को होते) तो … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: मेरी आठवीं में पढ़ने वाली बेटी ने आज पढ़ते पढ़ते अचानक पूछ लिया: “पापा, एक छोटा सा फ्लैट बनान … more →