स्वामी विवेकानंद के उपदेशात्मक वचनों में एक सूत्रवाक्य विख्यात है । वे कहते थे: “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।” इस वचन के माध्यम से उन्होंने देशवासियों को अज्ञानजन्य अंधकार से बाहर निकलकर ज्ञ… more →
विचार संकलनwrote 5 months ago: स्वामी विवेकानंद के उपदेशात्मक वचनों में एक सूत्रवाक्य विख्यात है । वे कहते थे: “उत्तिष्ठत जाग्रत प् … more →
wrote 8 months ago: यह नितांत सत्य है कि सभी जीवधारियों का भौतिक अस्तित्व पदार्थमूलक है, अर्थात् उनके अस्तित्व की अनुभूत … more →
wrote 9 months ago: आत्मा-परमात्मा जैसी सत्ताएं होती हैं या नहीं इस बारे में मेरी कोई भी धारणा नहीं बन सकी है । कदाचित् … more →
wrote 1 year ago: वर्ष २००९ का आगमन हो चुका है । पिछले वर्ष सारा विश्व आर्थिक मंदी से जूझता रहा, तो अपना देश उसके साथ … more →
wrote 1 year ago: ईशोपनिषद् ग्रंथ में मनुष्य को भौतिक संग्रह करने की अपनी लालसा पर नियंत्रण करने का उपदेश अधोलिखित मंत … more →
wrote 1 year ago: हमारे देश की संघीय व्यवस्था में अशोक की लाट शासन के प्रतीक के तौर पर स्वीकारा गया है और उसके साथ अंक … more →
wrote 1 year ago: छ: वैदिक मन्त्रों की इस शृंखला में अधोलिखित मन्त्र (यजुष्) अन्तिम है:- सुषारथिरश्वानिव यन्मनुष्यान् … more →
wrote 1 year ago: मैं शुक्लयजुर्वेद के चौंतीसवें अध्याय के उन छः मंत्रों की चर्चा कर रहा हूं जिनका अंतिम चरण ’तन्मे मन … more →
wrote 1 year ago: इस स्थल पर शुक्लयजुर्वेद के जिन मन्त्रों की बात मैं कर रहा हूं (तीसरे के लिए क्लिक करें) उनमें क्रमश … more →
wrote 1 year ago: इस बात की चर्चा पहले की जा चुकी है कि शुक्लयजुर्वेद के ३४वें अध्याय के आरंभ के सभी छः मन्त्रों का अन … more →