फ़िराक़ गोरखपुरी (रघुपति सहाय) (1896-1982) एक ऐसे उर्दू शायर जो किसी परिचय के मोहताज़ नहीं। उस ज़माने में पीसीएस की नौकरी ठुकरा कर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाना मुनासि… more →
खरी खोटीOm wrote 2 years ago: फ़िराक़ गोरखपुरी (रघुपति सहाय) (1896-1982) एक ऐसे उर्दू शायर जो किसी परिचय के मोह … more →
Om wrote 2 years ago: “न हाथ थाम सके, न पकड़ सके दामन बड़े क़रीब से उठकर चला गया कोई।” फ़िल्मों की समझ मुकम्मल होने से काफ … more →