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Blogs about: वो

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वो बहुत याद आए भुलाने के बाद8 comments

Rohit Jain wrote 2 months ago: वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी ब … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Sep, 2009, 2009, आए, कविता, के, गज़ल, जैन

जो प्यार करते हो तुम भी उनको,तो ये जान लो...3 comments

Nidhi KM wrote 5 months ago: तुम कहते हो,वो बेवफा हो गया है… प्यार मे दर्द, हर रोज़ दे गया है… कभी सज़ा देता है, तो क … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, क्या, जाना, तुमने, तुम्हे, प्यार, हिंदी कविता, Blessings

वो शब्दों की बात करता है...

Nidhi KM wrote 8 months ago: वो कहता है, तुम अपना प्यार शब्दों में बयां करती हो कैसे ? वो शब्दों की बात करता है … जो दिल मे … more →

Tags: कविताएँ, छनिकाएँ, nidhi, प्यार, तुम, दिल, अपना, शब्द, बात

वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है बन के लकीर हर इक, हाथों में आ बसा है वो मिले थे इत्तेफ़ाक़न हम ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देख है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता

Rohit Jain wrote 1 year ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है ज … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

जो हो चुका वो कभी इंतेहा नहीं होता

Rohit Jain wrote 1 year ago: हर तराशा हुआ बुत ख़ुदा नहीं होता हर आँख में दिल का आईना नहीं होता रही होंगी शायद कोई मजबूरियां उसकी व … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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