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वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो शख़्स धीरे धीरे साँसों में आ बसा है बन के लकीर हर इक, हाथों में आ बसा है वो मिले थे इत्तेफ़ाक़न हम ह … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Feb 2008, 2008, , कविता, गज़ल, जैन, धीरे

जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देख है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Jan 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता

Rohit Jain wrote 1 year ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है ज … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

जो हो चुका वो कभी इंतेहा नहीं होता

Rohit Jain wrote 1 year ago: हर तराशा हुआ बुत ख़ुदा नहीं होता हर आँख में दिल का आईना नहीं होता रही होंगी शायद कोई मजबूरियां उसकी व … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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