प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये है एक शाप इसी कारण देश और समाज कभी आगे बढ़ न पाया।’‘ फिर गौर किया सामने तो पूरा पंडाल खाली पाया उन्हों… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: धरती की रौशनी बचाने के लिये उन्होंने अपने घर और शहर में अंधेरा कर लिया फिर उजाले में कहीं वह लोग खो … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: ओ आम इंसान! तू क्यों ख़ास कहलाने के लिए मरा जाता है. खास इंसानों की जिन्दगी का सच जाने बिना क्यों बड … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पड़ौसन ने कहा उस औरत से ‘तुम्हारा आदमी रात को रोज शराब पीकर आता है पर तुम कुछ नहीं कहती वह आराम से … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: नववर्ष की पूर्व संध्या पर फंदेबाज अग्रिम बधाई देने घर आया और बोला ‘‘दीपक बापू, इधर कई बरसों से सांता … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: एक तलाश पूरी होते ही आदमी दूसरी में जुट जाता अंतहीन सिलसिला है अपने मकसद रोज नये बनाता पूरे होते ही … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उदास बैठा था चेला तो गुरू ने उसका कारण पूछा तो वह बोला ‘गुरूजी सभी आश्रम पर भक्तों का लगता है मेला … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं जैसे ही स्कूटर से उतरा तो मेरे मित्र ने मुझे देखते ही कहा-‘पिटवा दी भद्द। टोक दिया न उडन तश्तरी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब भी हम ढूढ़ते हैं अपने लिए प्यार पर मिलती है सब जगह से दुत्कार खुद करो चाहे किसी से भी तुम मांगो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी अलग पहचान के लिये भीड़ से अलग होना ही पड़ता है जब चुनते हैं अपनी अलग राह छोड़नी पड़ती है साथी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बदलते मौसम के साथ मन भी यूं बदल जाता है जैसे उसके साथ बंधे हों हाथ ग्रीष्म के जलती दोपहर में व्यग्रत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फटे हुए कपडे पहने चक्षुओं से अश्रु प्रवाहित करता हुआ फंदेबाज आ पहुंचा और बोला ”दीपक बापू आज ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर लिखने वाले एक कविनुमा ब्लोगर को भी आयोजकों ने कविसम्मेलन में बुलाया जब वह भी पहुंचा मंच … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: निजी अस्पतालों के बाहर लिखा रहता है ‘गरीबों का इलाज मुफ्त किया जाता है’ शायद इसलिए उनके … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आ गया सुबह एक फंदेबाज और बोला ”दीपक बापू मजा नहीं आ रहा आपकी हास्य कवितायेँ तीन चार दिन से रस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हीरो ने चांटा मारा एक लड़के को बडे जोर से थप्पड़ तो वह भी हीरो हो गया जिस पर नहीं पहुँचती किसी की न … more →