Lost your password?

Blogs about: व्यंग्य कविता

Featured Blog

चेहरा बदल जाता है, चाल नहीं-व्यंग्य कविता (Face turns, not tricks - satirical hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 10 hours ago: इंसान के चेहरे बदल जाते हैं नहीं बदलती चाल। खून खराबा करने वाले हाथ बदल जाते हैं वही रहती तलवार और ढ … more →

Tags: कला, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, E-patrika, hindi patrika

पैसे से गाडी खरीदी है रास्ता नहीं-व्यंग्य चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

वादा और इंतजार-व्यंग्य कविता (vada aur intzar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, bharat

रौशनी करने का सदियों पुराना अभियान-व्यंग्य कविता (raushni ka abhiyan-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: दीपावली पर घर में आले में बने मंदिर से लेकर गली के नुक्कड़ तक प्रकाश पुंज सभी ने जला दिये। अंतर्मन मे … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, शायरी, सूचना, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

ख्वाब जब हकीकत बनते हैं-हिन्दी शायरी (khavab aur haqiqut-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सपने जैसे शहर में ख्वाब लगती उस इमारत की छत के नीचे रौशनी की चमक से आंखें चुंधिया गयी हैं फिर याद आत … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, समाज

तीक्ष्ण बुद्धि-हास्य कविता (sharp mind-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज के बच्चे अपने माता पिता के बाल्यकाल से अधिक तीक्ष्ण बुद्धि के पाये जाते यह सच कहा जाता है। किस ना … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

किसी को रात डराती,किसी को दिन-हिन्दी शायरी (din aur raat-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हमने देखा था उगता सूरज उन्होने देखा डूबता हुआ वह कर रहे थे चंद्रमा की रौशनी में जश्न मनाने की तैयारी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

क्रिकेट और फिल्म में सफलता का साया-हास्य कविता(cricket and film-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नायिका ने बहुत किया अभिनय पर चलचित्रों में सफलता का दौर नहीं चल पाया। नंबर वन की दौड़ में न पहुंचने प … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

रिश्ता और सवाल जवाब-हास्य कविता (rishta aur sawal jawab-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: रिश्ता तय करने पहुंचे लड़के ने लड़की से पूछा ‘‘क्या तुम्हें खाना पकाना सिलाई कढ़ाई, बुनाई तथा घर गृहस्थ … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, लघुकथा, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu

कल के बड़े और आज के बच्चे-हिंदी हास्य कवितायें( badi aur bachche-hindi haysa kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बेटे ने मां से कहा ‘‘मां, मुझे पैसा दो तो कार खरीद कर लाऊं कालिज उससे जाकर अपनी छबि बनाऊं पापा, नोटो … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, India, bharat, अनुभूति, साहित्य, Internet

सच का सामना और हास्य कवि-हास्य व्यंग्य कविता (face for trutu and hindi poet-hasya kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उन सज्जन ने सच की पहचान करने वाली मशीन की दुकान लगाई पर उसके उद्घाटन के लिये कोई तैयार नहीं हुआ भाई। … more →

Tags: writing, हिन्दी, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, yakeen, India, अनुभूति

कवि का टीवी साक्षात्कार-हिन्दी हास्य कविता(intervew of hindi poet-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कवि ने टीवी एंकर से कहा ‘यह मेरे साक्षात्कार का बेकार नाटक रचाया। तुम सवाल करते हुए जवाब भी बताकर उस … more →

Tags: अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, अनुभूति, Blogger, Blogging, शब्द, दीपकबापू

समाज सेवा में सदाबहार-हिन्दी हास्य कविता (social service-hindi comedy satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात की बूंदें जैसे ही आकाश से जमीन पर आई। अकाल राहत सहायता समिति के सदस्यों के चेहरे पर चिंता घिर … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

जाम,आदर्श और कविता की शाम -हास्य कविता (jaam aur sham-hindi hasya kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: एक पुराने कवि ने अपनी पहली कविता लिखने के दिवस को साहित्यक पदार्पण दिवस के रूप में मनाया। ढेर सारे ह … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, Friends, समाज, मातृभाषा, मय, E-patrika, दीपकबापू, दीपक भारतदीप

हांड़मांस के इंसान-हिंदी हास्य कविताएँ (insan aur nat-hasya kavita)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: पर्दे पर आंखों के सामने चलते फिरते और नाचते हांड़मांस के इंसान बुत की तरह लगते हैं। ऐसा लगता है कि जै … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, समाज, साहित्य

वस्त्रों के पैमाने शर्म का आधार मत बनाओ-व्यंग्य कविता (Clothes do not make the basis of shame scale - satirical poem) 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वासनओं पर जितना नियंत्रण करोगे वह बढ़ती जायेंगी। तुम उन्हें भगाने की कोशिश मत करो वह तुम्हें दौड़ायेंग … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

भले होने का प्रमाण पत्र कहाँ से लायें-हिंदी व्यंग्य कविता (certificat of good men-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: उसने पूछा ‘क्या तुम बुरे आदमी हो‘ जवाब मिला ‘कभी अपने काम से कुछ सोचने का अवसर ही नहीं मिला इसलिये क … more →

Tags: आदमी, चरित्र, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

बहस और बाजार-व्यंग्य कविता (bahas aur bazar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सभागार के तले मंच पर चले बहसों के दौर सुबह और शाम। दिन पर चले पर नतीजा सिफर छलकते हैं फिर भी रात को … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Bloging, Deepak bapu

जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये है … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, Bloging, Blogging, bharat


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS