दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शाम का समय था और उन शराब के नशे में धुत उन दोनों लड़कों में एक ने राह पर अकेले जा रही उस लड़की का ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच त … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: देश के बुद्धिजीवियों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया था। गोलमेज सम्मेलन का विषय था कि ‘जूता बड़ा कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: इस प्रथ्वी पर जीवन अपनी सहज धारा से बहता जाता है। अनेक आपदायें इस प्रथ्वी पर आती हैं पर फिर सब कुछ स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते हैं पत्थर के बुतों में भगवान नहीं मानेंगे पर भगवान के बुत उड़ाने पहुंच जाते जवाब नहीं देना इसल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर छद्म मित्रों और आलोचकों ने मेरी सोच को बहुत संकीर्ण बना दिया है। इसलिये अगर अपने ब्लाग/ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वृंदावन की यात्रा कर हम दोनों पति-पत्नी दोनों ही खुश होते हैं। इस बार जब हम दोनों वहां पहुंचे तो बर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक महिला ब्लाग लेखिका ने किसी वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल लिखते हुए क्लिक किया होगा। बस उसके संपर्क में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दिन भर ईंट, पत्थर और सीमेंट का मसाला-तस्सल सिर पर रखकर ढोती वह औरत रात्रि में प्लास्टिक की छत से ढंक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको अपना समझकर सच कहा वह बेगाना समझने लगे जब तक उनकी लापरवाह अदाओं पर खामोश रहे उनको हम अच्छे लगे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल पर्यावरण दिवस था। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिला हो जिसे पर्यावरण बचाने की चिंता हो। इसका कारण भी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी ब्लाग जगत का व्यवसायिक रूप करीब-करीब मैंने समझ लिया है और अब मुझे किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर लिखते हुए आप कोई बात दावे से नहीं कह सकते क्योंकि एक तो इसका क्षेत्र बृहद है और इसमें तक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुरू किया क्योंकि मोहल्ले का वाचनालय हमारे किराये के घर के पास … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह ब्लाग (पत्रिका) आज बीस हजारिया हो गया-यानि इसकी पाठक संख्या बीस हजार पार हो गयी थी। इसने दस हजार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर बहू ने अपना एक ब्लाग बनाया और अपनी सास को भी दिखाया हंसते हुए सास ने कह दिया ‘तुम मेरे क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लाया फंदेबाज कई तस्वीरें और दिखाते हुए बोला ‘‘दीपक बापू, तुम ही एक दोस्त हो जिससे हम कुछ कह पाते हैं … more →