Blogs about: व्यंग्य चिंतन
लोगों की लिखने-पढ़ने की रुचि में बदलाव भी संभव-आलेख
दीपक भारतदीप wrote 23 hours ago: कल मैंने हिंदी अंग्रेजी अनुवाद टूल पर … more »
अंधेरे मे तीर चलाना ही उनका काम है-चार क्षणिकाएं
दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: हादसों की खबर से अब शहर सिहरता नहीं अप … more »
मै अखबार आज भी क्यों पढ़ता हूं-हास्य व्यंग्य
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दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुर … more »
क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन लिख देना-हास्य व्यंग्य
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दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: ब्लागर अपने कंप्यूटर पर बैठा था कि उसक … more »
क्या क्रिकेट की पुनःप्रतिष्ठा इंटरनेट के लिये चुनौती है?
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: मुझे याद है जब पिछली बार मैं ब्लाग बना … more »
श्रृंगार रस में आधुनिक कवितायें-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: आया एक आशिक का ईमेल लिख था उसमें ‘‘दीप … more »
इस ब्लोग (पत्रिका) के बीस हजारिया होने पर विशेष संपादकीय
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दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: यह ब्लाग (पत्रिका) आज बीस हजारिया हो गय … more »
अपने आप हिट बना देगा-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: सर्वशक्तिमान के घर से निकलकर दोनों नि … more »
छद्म ब्लाग ने सास से बचाया-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: अंतर्जाल पर बहू ने अपना एक ब्लाग बनाया … more »
सत्य से पीछा छुड़ाकर कहां जायें-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: लाया फंदेबाज कई तस्वीरें और दिखाते हु … more »
समूह और वर्ग होते हैं भ्रम का प्रतीक
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: समाज को बांटकर विकास … more »
प्रतिबंध के बाद लगाये शोएब अख्तर ने फिक्सिंग के आरोप
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शोएब अख्तर पर अनुशासनहीनता के आरोप मे … more »
पेट में खाया कौन देखता है-आलेख
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: समाज के नाम पर सभी पुरानें रीतिरिव … more »
नाम, छद्मनाम और अनाम (२)
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर अनाम और छद्मनाम वाले लोगो … more »
ब्लोग पर कमेन्ट को ही गुलाल और पकवान समझना-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर अपनी प्रेमिका को लुभाने क … more »
खुद ही बहकते हैं लोग-हिन्दी शायरी
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अपने लिखने से मैं दुनिया बदल सकता तो ऐ … more »
अभिव्यक्ति और भंड़ास-हास्य व्यंग्य
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: लोग दोस्तों से नाखुश रहते हैं कि वह मद … more »
कवि मन को कभी नहीं समझ पाओगे-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कवि से उसने कहा ‘तुम कवितायेँ ही लिख … more »
तरक्की का यही है खेल-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: पढें फारसी बेचें तेल पढें अंग्रजी खाल … more »
