Blogs about: व्यंग्य

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जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 hours ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

बरसात के साथ धार्मिक चालाकी-हिंदी व्यंग्य (hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 day ago: अध्यात्म नितांत एक निजी विषय है पर जब उसकी चौराहे पर चर्चा होने लगे तो समझ लो कि कहीं न कहीं उसकी आ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, पर्यावरण, मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

अथ लंठ महाचर्चा

Girijesh Rao wrote 1 week ago: (1) अथ लंठ महाचर्चा। (2) बहुत दिनों तक टालने के बाद आज अंगुलियाँ इस बिषै (विषय नहीं) पर चल ही पड़ीं। … more →

Tags: समाज, हास्य, अश्लील, महाचर्चा, मूढ़, लंठ, संस्कारवान

"बम चिकी बम...बम....बम"1 comment

राजीव् तनेजा wrote 1 week ago: ***राजीव तनेजा*** "बोल बम चिकी बम चिकी बम…बम….बम" "बम….बम…ब … more →

Tags: अबला नारी, बाबा, ब्लात्कार, हास्य

छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

Tags: अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

लाज और झिझक छोड़ें

Girijesh Rao wrote 3 weeks ago: जून का पहला सप्ताह बीत गया लेकिन गड्ढा प्रतियोगिता पर कोई प्रविष्टि प्राप्त नहीं हुई।  आप सभी नर ना … more →

Tags: समाज, प्रतियोगिता, Competition, गड्ढा

गड्ढा प्रतियोगिता4 comments

Girijesh Rao wrote 1 month ago: पूर्ववर्ती लेख वह गढ्ढा , वह गढ्ढा: कहानी में ट्विस्ट पश्चिम में एक दार्शनिक हुए थे - विट्गेंस्टी … more →

Tags: प्रतियोगिता, Competition, गड्ढा, गढ्ढा, गोमती नगर, लखनऊ टूरिज्म

वह गढ्ढा : कहानी में ट्विस्ट

Girijesh Rao wrote 1 month ago: आप से विदा लेने के बाद जब मैं इस गड्ढे के पास पहुँचा तो उसमें से झाँकते वाल्व को देख कर मुझे अपने अन … more →

Tags: गड्ढा, गढ्ढा, गोमती नगर, नगर निगम, लखनऊ, विकास खण्ड

वह गढ्ढा14 comments

Girijesh Rao wrote 1 month ago: (अ) भूमिका: भारतीय नगरीय परिप्रेक्ष्य में गढ्ढे कइ प्रकार के होते हैं: नई कॉलोनियों में कूडा फेंकन … more →

Tags: गढ्ढे, गोमती नगर, नगर निगम, लखनऊ, सूअर

राजमहल की डिनर टेबल से (भाग - 3) : तैलाख्यान

Girijesh Rao wrote 1 month ago: .. तेल का जैसा प्रयोग आप अपनी धुरखेल पार्टी में देखने के अभ्यस्त हैं, वैसा भाग-जा पार्टी में नहीं हो … more →

Tags: Indian Elections, democracy,  आँख में धूल,  चन्द्रगुप्त,  चाणक्य,  ज्योतिष,  पूर्णाहुति,  राजमहल,  विज्ञान

राजमहल की डिनर टेबल से (भाग 2) - राजकुमार की शिक्षा

Girijesh Rao wrote 1 month ago: डिनर के बाद जब महारानी मोनियो अगले दिन के विभिन्न अवसरों पर बोलने के लिए लिखी हुई बातों को याद करने, … more →

Tags: democracy, Indian Elections, कोकशास्त्र, दलदल, पंचतंत्र, बुढ़भसी, मोनियो, राउल

बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हास्य व्यंग्य, bharat

राजमहल की डिनर टेबल से (भाग - 1)5 comments

Girijesh Rao wrote 1 month ago: प्रारम्भ में ही स्पष्ट कर दूँ कि राजमहल में मेरा कोई आना जाना नहीं है. मैं आप ही की तरह राजमहल के पा … more →

Tags: चुनाव, democracy, Indian Elections, काला धन, बैंक, राउल, स्विटजरलैण्ड

बीच बाज़ार में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सूरत देखकर ही लोग सिर पर ताज पहनाते हैं किसकी सीरत कौन देखेगा अपने काम पर लोग खुद ही शर्माते हैं. कह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep

राम और रावण की भूमिका-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह स्वस्थ्य सुंदर युवक रामलीला मंडली में भगवान श्री राम की भूमिका निभाता था। इसी कारण लोग उसको राम … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, Friends

बुत सम्मलेन में एक सवाल-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह विशेष बुत अपना भाषाण दे रहा था। उसका विषय था समाज की समस्यायें और उनका हल। उसने अपना भाषण समाप्त … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लघुकथा, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

इन्सान जमीन पर कटते रहे-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →

Tags: कविता, नज़रिया, शायरी, भारत, Education, Internet, शब्द, web duniya, hindi sahitya

चांदी के कप की खातिर- हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: इतिहास में नाम दर्ज करने की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये वह किसी भी हद तक जाऐंगे। कहीं जिंदा आदमी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, रचना, लेखक, हिन्दी


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