यौं रहीम कैसे निभै, बेरे-केर कौ संग। वो डोलत रस आपनै, उनके फाटत अंग॥ साहित्य अगर बेर का वृक्ष है तो ब्लॉग केले का वृक्ष। ……………………………… more →
पसंदSunil Deepak wrote 2 months ago: पुराने जो न कह सके से नये चिट्ठे का सफर बचपन से ही जाने किन बातों की वजह से मेरे मन में जो अपनी छवि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 5 months ago: यौं रहीम कैसे निभै, बेरे-केर कौ संग। वो डोलत रस आपनै, उनके फाटत अंग॥ साहित्य अगर बेर का वृक्ष है तो … more →