Lost your password?

Blogs about: व्याख्यात्मक टिप्पणियां

Featured Blog

कम्युनिस्ट और मजदूर वर्ग की पार्टियाँ

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: घोषणापत्र का यह वाक्य कि “कम्युनिस्ट मजदूर वर्ग की पार्टियों के बदले में अपनी कोई अलग पार्टी न … more →

Tags: कम्युनिस्ट, सर्वहारा, विरासत, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, कम्युनिस्ट पार्टी क, डेविड रियाज़ानोव

पूंजीवादी संचय मेहनतकश वर्ग के दरिद्रीकरण और अध:पतन की ओर -- सम्पत्तिहर्त्ताओं के सम्पत्तिहरण की ओर ले जाता है

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 31.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां उस स्थिति में भी जब मजदूर … more →

Tags: सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, कार्ल मार्क्स, कम्युनिस्ट पार्टी क, वर्ग चेतना, डेविड रियाज़ानोव

सर्वहारा और कानून का सम्मान 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 29.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां निजी संपत्ति समस्त पूंजीव … more →

Tags: सर्वहारा, मार्क्सवाद, विरासत, एंगेल्स, कार्ल मार्क्स, कम्युनिस्ट पार्टी क, डेविड रियाज़ानोव, मजदूरों का जीवन

बुर्जुआ समाज के अंतरविरोध और सर्वहारा द्वारा इनका उपयोग2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 5 months ago: 27.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां बुर्जुआ वर्ग की कतारों के … more →

Tags: आंदोलन, सर्वहारा, मार्क्सवाद, संघर्ष, विरासत, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, कम्युनिस्ट पार्टी क, वर्ग चेतना

पूंजीवाद के खिलाफ मेहनतकश वर्ग के प्रतिरोध के विभिन्न रूप

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 23.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां पूंजीवादी समाज मेहनतकशों … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

मजदूर पूंजीपति को उधार देता है1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 21.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “ऐसे प्रत्येक देश म … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

श्रम और श्रमशक्ति

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 18. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां यहाँ पर मार्क्स और एंगेल्स … more →

Tags: सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, बाल श्रम, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, Marxism, एंगेल्स

मैन्युफैक्चर और बड़े पैमाने के उत्पादन (मशीनोफैक्चर) की कालावधियों में श्रम विभाजन

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 17. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां दस्तकार किसी वस्तु के एक क … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

सर्वहारा वर्ग का ऐतिहासिक विकास 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 16. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां वर्तमान समय में ‘सर् … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

संकटों के सिद्धांत और इतिहास के बारे में कुछ बातें1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां अंग्रेज़ मेहनतकश व … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 14. पूंजीवाद और प्रकृति पर मनुष्य की विजय सन 1848 तक प्रकृति पर मनुष्य की विजय का काम बहुत धीमी गति … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

‘कम्युनिस्ट घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां-13

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: पूँजी का संचय पूंजीपतियों के व्यक्तिगत नियंत्रण में पूंजी का संचय दो तरीकों से होता है. सबसे पहले श् … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, Marxism, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत

दर्शन के प्रश्नों पर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: वार्ता विशेष माओ त्से-तुङ 18 अगस्त, 1964 यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अपने कुछ वरिष्ठ कामरेडों के सा … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, फासिज्म

‘कम्युनिस्ट घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां-12

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: शहर और गाँव के बीच दरार जर्मनी में पहले विशाल पैमाने के श्रम विभाजन, शहर से गाँव के अलगाव को स्थापित … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, Marxism, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, Karl Marx

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-11. पूंजीवादी व्यवस्था के अंतर्गत संचार के साधनों और परिवहन का विकास 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 11. पूंजीवादी व्यवस्था के अंतर्गत संचार के साधनों और परिवहन का विकास “उद्योग और कृषि की उत्पाद … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, Marxism, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, Karl Marx

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-10. विश्व बाज़ार का मात्रात्मक और गुणात्मक विकास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 10. विश्व बाज़ार का मात्रात्मक और गुणात्मक विकास “मशीनों के आविष्कार के पहले प्रत्येक देश की औद … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, Marxism, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-6. बुर्जुआ वर्ग का राजनितिक विकास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: 6. बुर्जुआ वर्ग का राजनितिक विकास यहाँ पर लेखकों का मंतव्य सर्वप्रथम और प्रमुख रूप से फ्रांसीसी बुर् … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पुस्तकें

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-4. मैन्युफैक्चर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: ['कम्यूनिस्ट घोषणापत्र' पर राजनीतिशास्त्र के कई विद्वानों ने व्याख्याएँ और टिप्पणियां लिखी हैं. इनमे … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पुस्तकें, मार्क्सवाद

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-3. मध्ययुगीन अर्थव्यवस्था का ह्नास, भूगोलिक खोजों का युग और विश्व-बाज़ार की शुरुआत

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: 3. मध्ययुगीन अर्थव्यवस्था का ह्नास, भूगोलिक खोजों का युग और विश्व-बाज़ार की शुरुआत पंद्रहवीं शताब्दी … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS