संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं ज्यों रहीम ससि रहत है, दिवस अकासहिं मांहि कविवर रहीम कहते हैं कि भ्रम में आकर आदमी तमाम तरह की आदतों का शिकार हो जाता है और उसमें अपनी संपत्ति का अपव्यय करता रहता… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 5 months ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्रण … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हिंदी ब्लाग जगत के कुछ ब्लाग लेखक अंतर्जाल पर वैसी ही गुटबाजी देख रहे हैं जैसी कि सामान्य रूप से बाह … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: आप सुबह किसी दुकान पर जाकर ऐसे ही खड़े होकर वहां रखी चीजें देखिये तो दुकानदार आपसे पूछेगा‘ आपको कौनसी … more →
Gayatri wrote 9 months ago: ज़िन्दगी के मायने कुछ धुंधलाने लगे है “फार्मोलों “से आगे “बिज़नस सूट “आने लग … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अमेरिका के उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि वर्तमान मंदी अगले चार साल तक चल सकती है। बिल गेट्स विश्व … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कंपनियों का सच यही है कि वह आम निवेशक और उपभोक्ता और अपने कर्मचारी का शोषण करने के लिये बनायी जाती ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: संपति भरम गंवाइ के, हाथ रहत कछु नाहिं ज्यों रहीम ससि रहत है, दिवस अकासहिं मांहि कविवर रहीम कहते हैं … more →
jarapanjara wrote 1 year ago: Marketiva हिन्दी आप करने जा रहे हैं ऑनलाइन धन बनाने के रहस्य का पता नहीं हैं कि आप को के बारे में जा … more →
Amit wrote 1 year ago: भईये टैम बोत खराब है! हाँ यदि आपने याहू (Yahoo!) के शेयर खरीद रखे हैं या फिर आप याहू के कर्मचारी हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इधर जाएँ कि उधर यह कभी तय नहीं कर पाए जिस माया को पाने की चाहत है उसके आदि और अंत को समझ नहीं पाए चा … more →
khudra wrote 2 years ago: भारत में खुद्रा जनवाद व व्यापार … more →