Blogs about: वक़्त

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जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं11 comments

विनय wrote 6 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, चाह, दोस्त, लोग, Heart, time, दिल, याद, बाज़ार

यह जिस्म नहीं है4 comments

विनय wrote 9 months ago: यह जिस्म नहीं है, काँच के टुकड़े हैं ज़मीने-वक़्त पर दूर तक बिखरे हैं इन्हें मत छूना हाथों में चुभ जाय … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Heart, Love, time, दिल, प्यार, नाम, मोहब्बत

वक़्त का पहना उतार आये6 comments

विनय wrote 1 year ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना … more →

Tags: मेरा गीत, angel, इश्क़, ख़ला, ख़ाब, ख़ाहिश, दर, दस्तूर, दिल

अश्क से पहले आँच उठती है5 comments

विनय wrote 1 year ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँख टिकती है बाटे हुए सब वक़्त के धागे पर उनमें अब गिरह दिखती है … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, इश्क़, गिरह, Love, time, eyes, प्यार, मोहब्बत

उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की

विनय wrote 1 year ago: उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की बचाये ख़ुदा! नज़र न लग जाये ज़माने की तेरी जुस्त-जू को न मिट … more →

Tags: रुबाइयाँ, उम्मीद, इश्क़, Love, time, प्यार, मोहब्बत, ख़ुदा, नज़र

सदियाँ कटता रहूँगा1 comment

विनय wrote 1 year ago: सदियाँ कटता रहूँगा वक़्त गुज़ारता रहूँगा तुम जो हँसते रहो मैं भी हँसता रहूँगा.. शायिर: विनय प्रजापति ‘ … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, दोस्ती, प्यार, मोहब्बत, सदियाँ, हँसना, ERA, Friendship

वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है

विनय wrote 1 year ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने न … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, time, Reminisce, याद, दीवाना, बहार, सदा, ख़ुदा

कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त

विनय wrote 1 year ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ तक न गिरा अबकि हारे तो टूट जाये ‘नज़र’ मेरे दिलसित … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, time, प्यार, नाम, मोहब्बत, क़तरा, name

वो वक़्त

विनय wrote 1 year ago: वो वक़्त कि वक़्त हमें सिर पे लिए फिरता था अब है कि मेरे दरवाज़े से गुज़रते हुए डरता है कारू के ख़ज़ाने म … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, time, दरवाज़ा, Life, Money, कारू, ख़ज़ाना, सिक्का

यह लम्हा गुज़र जाने दो

विनय wrote 1 year ago: जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो न रोको इसे न सँभालो, बह जाने दो… वक़्त के क़तरे बहते रहते … more →

Tags: मेरा गीत, अजनबी, आवाज़, इश्क़, दर्द, दफ़्न, नशेमन, प्यार, मर्तबान

नया हुनर पाने का वक़्त आया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुलाने का वक़्त आया है आओ बुझा दें पुरानी शम्मों को नई शम्में जलान … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा

Rohit Jain wrote 1 year ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जायेगा वो इस ज़बाँ से उस ज़बाँ ये किस्सा ले जायेगा दुआ माँगी तो थी … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है1 comment

विनय wrote 1 year ago: तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है तू मोहब्बत है मेरी या फिर साँसों की ज़ंजीर है जब तुझे देखा सनम मुझ … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ुशी, इश्क़, Love, प्यार, चेहरा, मोहब्बत, दीवाना, तस्वीर

हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं

विनय wrote 1 year ago: हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं तेरे दिल की धड़कनों को सुनते हैं लेकिन कुछ समझ में नहीं आता है तुमको दे … more →

Tags: मेरा गीत, चाँद, रंग, इश्क़, बेताब, Love, दिल, प्यार, नाम

मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ1 comment

विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ ख़ुद से यारों ख़फ़ा रहने लगा हूँ कभी दिल कहे उसे अपना बना लूँ कभी दिल … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, दिल, प्यार, मंज़िल, मोहब्बत, दीवाना, ख़फ़ा

जो होता है भले के लिए होता है

विनय wrote 1 year ago: जो होता है भले के लिए होता है ख़ुद को समझने के लिए होता है इंसान की आदत है बदल जाना कि वह बदलने के ल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, इश्क़, हिसाब, Love, time, प्यार, आदत, मोहब्बत

चंद अशआर और...

विनय wrote 1 year ago: मुझे तुमसे मिलके मुकम्मिल होने का वक़्त है एक सूखा हुआ दरया हूँ जिसको घटा की प्यास है –x– … more →

Tags: रुबाइयाँ, ख़ुशी, मुराद, हासिल, इब्तदा, इन्तहाँ, इश्क़, शर्मिन्दा, हिसाब

वक़्त गुज़रा किया पल-पल आदतन

विनय wrote 1 year ago: मैं ईज़ा1 में पड़ा नदामत2 को तड़पता रहा जैसे शोला बुझती आग में भड़कता रहा मैं कमरे में बैठा खोया रहा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Heart, time, eyes, Moment, दिल, दरवाज़ा, नाम, बादल

माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग

विनय wrote 1 year ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतलब निकालते हैं लोग हुआ कब मुझ से उनका बुरा किसलिए नाम मेरा उछाल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, लोग, time, आदत, नाम, Pain, कहानी, Friend, Story


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