नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुलाने का वक़्त आया है आओ बुझा दें पुरानी शम… more →
इक शायर अंजाना सा...विनय प्रजापति wrote 1 month ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके ग … more →
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: अश्क से पहले आँच उठती है जब भी तुझपे आँ … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: सदियाँ कटता रहूँगा वक़्त गुज़ारता रहूँ … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: वो वक़्त कि वक़्त हमें सिर पे लिए फिरता थ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: जाने दो जाने दो यह लम्हा गुज़र जाने दो न … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुला … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: वक़्त का मुसाफ़िर छीनकर सफ़हा मेरा ले जाय … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: तेरा चेहरा मेरे प्यार की तस्वीर है तू … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: हम सनम जब भी तुमसे मिलते हैं तेरे दिल क … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: मैं सबसे जुदा-जुदा रहने लगा हूँ ख़ुद स … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: जो होता है भले के लिए होता है ख़ुद को सम … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: मुझे तुमसे मिलके मुकम्मिल होने का वक़् … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतल … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ त … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: अजब जाला है डोरियों का एक डोर का छोर जा … more →