दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है कोई साज़ नहीं है कानों में शहनाई सी है हाय तमाशा क्या लगा है मेरे दिल के आस पास सुरूर-ए-कैफ़ की बारिश है और तन्हाई सी है आँखों में इक जुस्तजू है ज़ेहन में मेरे त… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है कोई साज़ नहीं है कानों में शहनाई सी है हाय तमाशा क्या लगा है … more →