Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: नदी की बूंद सा बहता लम्हा हुआ ना तिजोरी मे कैद लम्हा ख्यालों पे जीवन लुटाता रहा जीत हार बदले मे प … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मित्रों से झगड़ता चल बीबी पे बिगड़ता चल बोर हुई इस दुनिया में तू मजा उन्हें भी देता चल। अपनी बात को ऊं … more →