चिराग़ की तरह पवित्र और जरूरी शब्दों को अंधेरे घरों तक ले जाने के लिए हम आततायियों से लड़ते रहे थके-हारे होकर भी और इस लड़त में जब हमारी कामयाबी का रास्ता खुला और वे शब्द लोगों के घरों और दिलो-दिमाग़ में … more →
यही है वह जगहअफ़लातून wrote 1 month ago: चिराग़ की तरह पवित्र और जरूरी शब्दों को अंधेरे घरों तक ले जाने के लिए हम आततायियों से लड़ते रहे थके-हा … more →