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Blogs about: शब्द

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सम्मान का भ्रम-हिन्दी हास्य व्यंग्य (samman ka bhram-hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: दीपक बापू तेजी से अपनी राह चले जा रहे थे कि पान की एक दुकान के पास खड़े आलोचक महाराज ने उनको आवाज देक … more →

Tags: arebic, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

शब्द वही हो तो भी : राजेन्द्र राजन

अफ़लातून wrote 1 week ago: चिराग़ की तरह पवित्र और जरूरी शब्दों को अंधेरे घरों तक ले जाने के लिए हम आततायियों से लड़ते रहे थके-हा … more →

Tags: Kavita, Literature, rajendra rajan, shabd, राजेन्द्र राजन, शब्द वही हों तो भी

हिंदी आध्यात्मिक सन्देश-बेकार के कम न करें तो ही ठीक (vidur niti-bekar kam n karen)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: तथैव योगविहितं यत्तु कर्म नि सिध्यति। उपाययुक्तं मेधावी न तव्र गलपयेन्मनः।। हिंदी में भावार्थ-अच्छे … more →

Tags: arebic, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, समाज

नवयुवती 1 comment

Nidhi KM wrote 2 weeks ago: सड़क के गढ्ढों मे, डोलता हुआ, आटो चला जा रहा था, एक स्टॉप मे, नवयुवती के चढ़ते ही, सारी नज़रे उस पर … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, छनिकाएँ, nidhi, Social, अपमान, जवान, नज़र, नवयुवती

यह स्वयंवर-हिंदी हास्य व्यंग (the swyanvar-hindi vyang

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जहां तक भारत की स्वयंवर परंपराओं से जुड़ी कथाओं की हमें जानकारी है तो उसके नायक नायिका तो नयी उम्र के … more →

Tags: आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, सूचना, हास्य व्यंग्य

ऐसे ही अफसाने-हिंदी व्यंग्य कविता (bade log-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →

Tags: कविता, inglish, व्यंग्य, भारत, India, bharat, Shayri, Blogger, Blogging

शोर और शांति-हिन्दी कविता (shor aur shanti)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शोर कर रही भीड़ में शांति कराने के लिये बहुत तेज आवाज में शोर मचाओगे तो तुम भी शांति के मसीहा हो जाओग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य

घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूस … more →

Tags: arbic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, हास्य, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

हमदर्दी बेजान होकर जताते-हिंदी कविता (bezan hamdard-hindi poem

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अक्सर सोचते हैं कि कहीं कोई अपना मिल जाए अपने से हमदर्दी दिखाए मिलते भी हैं खूब लोग यहाँ पर इंसान और … more →

Tags: arebic, Art, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य

बनाते हैं अपनी दुनियां खुद-हिंदी कविता (khud banate apne duinyan-hindi kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धरती पर अपने कदम दर कदम चलते हुए जब नजर करता हूं नीचे की तरफ तब जहां तक देखता हूं वहीं तक ख्याल चलते … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शायरी, शेर, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

दर्द देकर इलाज करने वाले-हिंदी शायरी (hindi poem)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपना दर्द यूं जमाने को न दिखाओ दवा देकर इलाज करने वाले हर जगह नहीं मिलते हैं। जो अल्फाजों की जादूगरी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

तुम 6 comments

Nidhi KM wrote 1 month ago: तुम बहुत मीठा बोलते हो, हर शब्द को, चाशनी मे घोलते हो, मिशरी की तरह, रस घोलते हो, न कड़वा बोलते हो, … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, दिल से दिल की बात..., कड़वा, तीर, तुम, मीठा, सच, हिंदी कविता

समाज हिलता नजर आता हास्य व्यंग्य कविता (javani divani aur budhapa-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शेर

सच बोलना कभी कभी ठीक नहीं होता-हिन्दी व्यंग्य कविता(truth and friends-hindi poem

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सच बोलना कभी कभी ठीक नहीं लगता कड़वा जो होता। सोचता भी नहीं कोई दिमाग की हलचल को सुन न ले दीवारों के … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, India, अनुभूति, media, Internet, Blogger, web duniya

कल्पना से परे-हिंदी व्यंग्य कविता (kalpna se pare-hindi vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब य … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, Blogger

कल के बड़े और आज के बच्चे-हिंदी हास्य कवितायें( badi aur bachche-hindi haysa kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बेटे ने मां से कहा ‘‘मां, मुझे पैसा दो तो कार खरीद कर लाऊं कालिज उससे जाकर अपनी छबि बनाऊं पापा, नोटो … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, India, bharat, अनुभूति, साहित्य, Internet

कवि का टीवी साक्षात्कार-हिन्दी हास्य कविता(intervew of hindi poet-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कवि ने टीवी एंकर से कहा ‘यह मेरे साक्षात्कार का बेकार नाटक रचाया। तुम सवाल करते हुए जवाब भी बताकर उस … more →

Tags: अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, अनुभूति, Blogger, Blogging, दीपकबापू, दीपक भारतदीप

हांड़मांस के इंसान-हिंदी हास्य कविताएँ (insan aur nat-hasya kavita)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: पर्दे पर आंखों के सामने चलते फिरते और नाचते हांड़मांस के इंसान बुत की तरह लगते हैं। ऐसा लगता है कि जै … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, साहित्य, हिंदी साहित्य

चाणक्य नीति-कुविचारी नारी से तो कोई साथ न हो अच्छा (chankya niti-kuvichari nari ka sath

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य महाराज कहते हैं कि ———————— … more →

Tags: inglish, चिन्तन, bharat, India, अभिव्यक्ति, अनुभूति, इंटरनेट, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप


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