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सि़यों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो ग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, bharat, Deepak bharatdeep

संत कबीर वाणी:मिल बाँट कर खाएं वही हैं वीर

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: संत कबीर महाराज कहते हैं कि ———————– कबीर तो सांचै म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, सन्देश, Deepak bharatdeep, dharm, hindi litreture, hindi writer, hindu

इन्सान जमीन पर कटते रहे-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →

Tags: कविता, नज़रिया, शायरी, व्यंग्य, भारत, Education, Internet, web duniya, hindi sahitya

क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

Tags: शायरी, व्यंग्य, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, अनुभूति, इंटरनेट, Deepak bharatdeep

भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————– कृमिकुलचितं लालाक्लिन् … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, alekh, Anubhuti, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम

भर्तृहरि शतकः हंसों का मूल गुण परमात्मा भी नहीं छीन सकता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अम्भोजिनी वनविहार विलासमेव हंसस्य हंति नितरां कुपितो विधाता। न त्वस्य दुग्धवाभेदविधौ प्रसिद्धां वें … more →

Tags: adhyatm, अध्यात्म, दीपक भारतदीप, धर्म, Deepak bharatdeep, hindi litreture, hindi writer, India, inlglish

भर्तृहरि नीति शतक: जिनकी देह,मन और विचार में अमृत हो ऐसे लोग नगण्य

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: मनसि वचसि काये पुण्यपीयूषपूर्णास्त्रिभुवनमुपकारश्रेणिभिः प्रीणयन्तः परगुणपनमाणून्पर्वतीकृत्य नित्यं … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep

सब चलता है-हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, व्यंग्य, हिंदी पत्रिका, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, epatrika


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