Blogs about: शब

दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते9 comments

विनय wrote 4 months ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, आँसू, आस्ताँ, ख़ुदा, चाँद, तस्व्वुर, दाग़, दिल, मरासिम

गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है7 comments

विनय wrote 7 months ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →

Tags: मेरा गीत, Arms, अंग, इरादा, गुलाबी, गोरी, चाहत, तीरे-नज़र, दीवाना

जब आसमाँ पे यह हिलाल आया

विनय wrote 1 year ago: जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमसे विसाल आया जिस शब तारों की बारात आयी मुझे तुम्हारा ही ख़्याल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Reminisce, प्यार, याद, मोहब्बत, ख़्याल, Beauty

यह सिलसिला यूँ ही थमा रहेगा

विनय wrote 1 year ago: रोज़, यह बुझता नहीं शब, यह गलती नहीं बिन तेरे सब कुछ थम के रह गया है *दिन में रोशनी होती है, इसलिए … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Love, light, Reminisce, प्यार, याद, रोशनी, मोहब्बत


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