सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है जहान को बन्दों को गिना जाता है तोला नहीं जाता किसके लहू का रंग है दामन पे बता दे जो लाख धोने पर मेरे … more →
इक शायर अंजाना सा...विनय wrote 1 year ago: मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही इस बद्तर ज़िन्दगी में यह क्या कम है हर शय तेरे सिवा कुछ दिखता ही नह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है ज … more →