मुझे तुमसे मिलके मुकम्मिल होने का वक़्त है एक सूखा हुआ दरया हूँ जिसको घटा की प्यास है –x– मेरे दामन में खु़शियाँ समेट के रख दे वह मैं उसे अपना चारागर इब्ने-मरियम कहूँ –x– वक़्ते-… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मुझे तुमसे मिलके मुकम्मिल होने का वक़्त है एक सूखा हुआ दरया हूँ जिसको घटा की प्यास है –x– … more →