शहंशाह आलम की एक कविता कुम्हार अकेला शख्स होता है जब तक एक भी कुम्हार है इस पूरी पृथ्वी पर और मिट्टी आकार ले रही है समझो कि मंगलकामनाएं की जा रही हैं कितना अच्छा लगता है जबकि मंगलकामनाएं की जा… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 1 year ago: शहंशाह आलम की एक कविता कुम्हार अकेला शख्स होता है जब तक एक भी कुम्हार है इस पूरी पृथ्वी पर और … more →