Blogs about: शाख़
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ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया चराग़… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब दामने- … more »
