विनय wrote 12 months ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →
विनय wrote 1 year ago: कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब दामने-ग़म में लौट गयी ख़िज़ाँ अब देखो उस रात पर शिगाफ़ आने लग गये असरका … more →