यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नहीं माहे-क़ामिल3 है जिसने मुझको कहा सबसे अच्छा वह कोई पारसा4 है या बातिल5 है? तुम जाने किस बात पर रूठे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 4 months ago: यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नह … more →
विनय wrote 1 year ago: हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल है न जाने कितना, बेशुमार दर्द इसमें शामिल है हर लम्हा ज़िन्दगी … more →
विनय wrote 1 year ago: यह कारवाँ किस जगह आ रुका है ज़िन्दगी को हासिल नहीं मिल रहा है हमने अब तक ऐसी मुहब्बत की है शायद जिसमे … more →
विनय wrote 1 year ago: ग़म देना उनकी फ़ितरत में शामिल होगा मेरी फ़ितरत तो मुहब्बत देने की रही है दूर रहना उनकी आदत में शामिल ह … more →