Blogs about: शायद

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शायद4 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

न वह कभी आँखों से उतारा ही गया6 comments

विनय wrote 11 months ago: न वह कभी आँखों से उतारा ही गया और न कभी लबों से पिया ही गया वह इक दर्द का बवण्डर था शायद न जिसे कभी … more →

Tags: मेरा गीत, Absorb, आँखें, आधा, कहकशाँ, खपना, ग़म, तारीक़ी, दर्द

दर्द सुलगते क्यों हैं

विनय wrote 1 year ago: दर्द सुलगते क्यों हैं जलते क्यों नहीं मेरी आँखों में अब्र हैं बरसते क्यों नहीं यह तुमको देखकर ही शाय … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, दर्द, Love, eyes, प्यार, मोहब्बत, Pain, इंतिज़ार

जब प्यार किसी से होता है

विनय wrote 1 year ago: एक ख़ुशबू जाने कहाँ से आयी है कुछ दिनों से दिल पर छायी है शायद, शायद ऐसा तब लगता है जब प्यार किसी से … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, इश्क़, बेताब, Heart, Love, दिल, प्यार, मंज़िल

शायद एक ही तरह सोचती है वह2 comments

विनय wrote 1 year ago: वह मुझे चाहती है या यूँ ही मुझसे बात करनी थी उसे कोशिश तो उसने मुझ तक पहुँचने की बहुत की थी और फिर व … more →

Tags: मेरी नज़्म, अय्यार, इश्क़, कोशिश, चाह, जवाब, नज़र, प्यार, मोहब्बत

तो शायद साँस पड़ जाये इनमें...

विनय wrote 1 year ago: एक पानी में भीगी हुई किताब जाने किसने? सूखने के लिए रख दी है धूप में जैसे जैसे नमी भाप बनती है पन्ने … more →

Tags: मेरी नज़्म, ज़िन्दगी, धूप, eyes, साँस, नीली, आँखें, Life, पन्ने


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