Blogs about: शाश्वत प्रेम पर

चलना ज़रा संभल कर-हास्य कविता 6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चिल्ला-चिल्लाकर करते हैं प्रेम मजे के लिए चाहिए जैसे गेम आखों में बसाए रहते हैं पाश्चात्य सभ्यता वाल … more →

Tags: arebic, अनुभूति, कला, कविता, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, शब्द, शायरी

यह प्यार है बाजार का खेल-कविता साहित्य 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जगह-जगह नारे लगेंगे आज प्यार के नारे बाहर ढूंढेंगे प्यार घर के दुलारे प्यार का दिवस वही मनाते जो प्य … more →

Tags: hindi, Kavita, शेर-ओ-शायरी, कविता, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, शेर

जिन्दगी का सफर 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सब समान जुटाकर निकले सफर पर ख़त्म हो गया तो लौटे अपने ही घर रास्ते बदलते गए, हम चलते गए कुछ देखा … more →

Tags: अनुभूति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, शब्द, शायरी, शेर, समाज, साहित्य

ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं सदियों से अपनी जगह खडे बुत भी लोगों को चल … more →

Tags: Blogroll, Vichar, hindi, Kavita, दृष्टिकोण, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, कविता, दर्द बांटते चलो

शाश्वत प्रेम पर एक कविता-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से वह बहता आता है सहज भाव से अपनी पीडाओं को भुला दो अपनी चाहतों … more →

Tags: Blogroll, Vichar, hindi, Kavita, vididha, दृष्टिकोण, Global Dashboard, कविता, inglish


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