न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गुफ़्त-गू है! बाहम= आपस में शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००४… more →
तख़लीक़-ए-नज़रAjad Panchhi wrote 10 months ago: इसराइल से आकर भारत के मंदिर में शादी करने का इसराइली दंपत्ति का सपना तो पूरा हो गया लेकिन उन्हें अंद … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: अपने देशवासियों की एक विचित्र आदत मुझे सदैव से ही विचलित करती रही है । यह आदत है अपने अनुचित कार्यों … more →
kmuskan wrote 1 year ago: अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है जानती हूँ ,तू शामिल नही … more →
विनय wrote 1 year ago: न कोई शिकायत है तुझसे न कोई गिला है तुम अपने हसीं लबों से हर्फ़ छुओ न छुओ कम-स-कम बाहम निगाहों में गु … more →