मित्रवत साथियो, क्या आप जानते हैं कि शोषण करने वाला शोषण सहने वाले से ज्यादा गुनहगार होता है। और सभी जानते हैं, शोषण सहने वाला अधिक परिश्रमी होता है और शोषण करने वाला ऐयाशबाज़ होता है और हवेली में आरा… more →
बिगुलShaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा … more →
Nishant wrote 2 months ago: छः साल के बालक अल्बर्ट आइंस्टाइन को जर्मनी के म्यूनिख शहर के सबसे अच्छे स्कूल में भरती किया गया। इन … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सच बात तो यह है कि दुनियां विश्वास के आधार पर तीन भागों में बंटी हुई हैं-आस्तिक,नास्तिक और स्वास्तिक … more →
Nishant wrote 4 months ago: बहुत साल पहले विश्वप्रसिद्ध जॉन्स होपकिंस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने वरिष्ठ विद्यार्थियों को यह प् … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: ट्रेनों और स्टेशनों को चमकदार बनाए रखने वाले १४०० सफाई कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं, ठेकेदरों … more →
डा. अमर कुमार wrote 5 months ago: अबतक आपने पढ़ा … औ्षधि तीन प्रकार की होती है 1- दैविक, 2- मानुषिक, 3- पैशाचिक । पैशाचिक औषधियो … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: लाल सवेरे का मुंह चूमो शिक्षा हर इन्सान की बुनियादी जरूरत है, चाहे वह मजदूर हो या किसान. … more →
योगेन्द्र wrote 9 months ago: दो दशक से अधिक का समय बीत चुका है जब मुझे इस बात का एहसास पहली बार हुआ कि अपनी मौलिक भाषाओं के प्रति … more →
माधव त्रिपाठी wrote 10 months ago: कल ५ सितम्बर था, शिक्षक दिवस था आज भी शिक्षको को उतना ही महत्व दिया जाता है लेकिन अब आज के शिक्षक न … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वृंदावन की यात्रा कर हम दोनों पति-पत्नी दोनों ही खुश होते हैं। इस बार जब हम दोनों वहां पहुंचे तो बर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पार्क में घूमती हुई लड़कियों को उस लड़के ने छेड़ा ‘हम तुम इक कमरे में बंद हों और शेर आ जाये उससे कहू … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के नाम पर सभी पुरानें रीतिरिवाजों को लोग इसलिये अपनाये हुए है कि उसमे अगर उनका कभी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब मैं कैसे लिख रहा हूं या पहले कैसे लिखता था उसके अच्छे-बुरे को निर्णय करने का जिम्मा तो मैं कभी भी … more →
oskanpur wrote 1 year ago: भारत मे सार्वजनिक वित्त पर चलने वाली शिक्षण सँसथाएं व खुला सोर्स कोड / लाइनक्स उबुँटू शिक्षा – … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फल कारण सेवा करे, करे न मन से काम कहैं कबीर सेवक नहीं, कहैं चौगुना दाम संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे मित्रों ने मेरे ब्लोग पर एक वेब साईट से लिए गए अपने सभी ब्लोगों की कीमत के बारे में लिखी गयी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कोई हारता और कोई जीतता कोई कैसे बांचता और कोई कैसे सुनाता चुनाव का खेल ऐसा है लड़ने और लड़ाने वाले य … more →