Blogs about: शिक्षा

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नींद से जागो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, भगत सिंह, मजदूर, ललकार, समाजवाद, सर्वहारा, हिन्दी साहित्य, शोषण-उत्पीड़न

जिज्ञासु बालक5 comments

Nishant wrote 2 months ago: छः साल के बालक अल्बर्ट आइंस्टाइन को जर्मनी के म्यूनिख शहर के सबसे अच्छे स्कूल में भरती किया गया। इन … more →

Tags: वैज्ञानिक, आइंस्टीन

आस्तिक, नास्तिक और स्वास्तिक- (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सच बात तो यह है कि दुनियां विश्वास के आधार पर तीन भागों में बंटी हुई हैं-आस्तिक,नास्तिक और स्वास्तिक … more →

Tags: hindi, writing, हिन्दी, Global Dashboard, inglish, हिंदी, व्यंग्य चिंतन, yakeen, India

रिसर्च1 comment

Nishant wrote 4 months ago: बहुत साल पहले विश्वप्रसिद्ध जॉन्स होपकिंस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने वरिष्ठ विद्यार्थियों को यह प् … more →

Tags: अन्य कथाएँ

दिल्ली मेट्रो की चकाचौंध के पीछे की काली सच्चाई[audio]

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: ट्रेनों और स्टेशनों को चमकदार बनाए रखने वाले १४०० सफाई कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं, ठेकेदरों … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, सर्वहारा, अनुभव, मजदूर का ऑडियो अख़बा, मजदूरों का जीवन

मेरा बाल्यकाल और कुमारावस्था1 comment

डा. अमर कुमार wrote 5 months ago: अबतक आपने पढ़ा … औ्षधि तीन प्रकार की होती है  1- दैविक, 2- मानुषिक, 3- पैशाचिक । पैशाचिक औषधियो … more →

Tags: आत्म-चरित, खण्ड-1, आत्मकथा, प्रेमरस, ग़ज़लों, उद्दण्ड, , कन्यायें, चोरी

देश की राजधानी की शिक्षा व्यवस्था : एक अनुभव

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: लाल सवेरे का मुंह चूमो शिक्षा हर इन्सान की बुनियादी जरूरत है, चाहे वह मजदूर हो या किसान. … more →

Tags: बिगुल, मजदूर, सर्वहारा, अनुभव

हिन्दीः कुछ निजी अनुभव

योगेन्द्र wrote 9 months ago: दो दशक से अधिक का समय बीत चुका है जब मुझे इस बात का एहसास पहली बार हुआ कि अपनी मौलिक भाषाओं के प्रति … more →

Tags: अंग्रेजी, देश, राजभाषा, हिन्दी, अध्यापन, अनुभव

शिक्षक दिवस वीतने पर 1 comment

माधव त्रिपाठी wrote 10 months ago: कल ५ सितम्बर था, शिक्षक दिवस था आज भी शिक्षको को उतना ही महत्व दिया जाता है लेकिन अब आज के शिक्षक न … more →

Tags: अवसर विशेष, शिक्षक, शिक्षक दिवस

विभिन्न समाजों का पुराने ढर्रे पर चलना अब कठिन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना, अनुभूति, आलेख

रेल की बोगी में ज्ञान की किताबें बेच सकते हैं, ज्ञान नहीं-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वृंदावन की यात्रा कर हम दोनों पति-पत्नी दोनों ही खुश होते हैं। इस बार जब हम दोनों वहां पहुंचे तो बर … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भाषा, मस्तराम

शेर के इंतजार में उम्र न निकल जाये-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पार्क में घूमती हुई लड़कियों को उस लड़के ने छेड़ा ‘हम तुम इक कमरे में बंद हों और शेर आ जाये उससे कहू … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शायरी, शेर, साहित्य

पेट में खाया कौन देखता है-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के नाम पर सभी पुरानें रीतिरिवाजों को लोग इसलिये अपनाये हुए है कि उसमे अगर उनका कभी … more →

Tags: writing, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, चिन्तन, भारत, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, Urdu

यूनिकोड से कृतिदेव की तरफ जाते हुए-आलेख6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब मैं कैसे लिख रहा हूं या पहले कैसे लिखता था उसके अच्छे-बुरे को निर्णय करने का जिम्मा तो मैं कभी भी … more →

Tags: arebic, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भाषा, संपादकीय, समाज, साहित्य

Open Source Software Education in India

oskanpur wrote 1 year ago: भारत मे सार्वजनिक वित्त पर चलने वाली शिक्षण सँसथाएं व खुला सोर्स कोड / लाइनक्स उबुँटू शिक्षा – … more →

Tags: उबुँटू, किसकी, कोड, खुला, चलने, जिम्मेदारी, पर, भारत, मे

संत कबीर वाणी:सेवा के बदले दाम मांगे वह सेवक नहीं 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फल कारण सेवा करे, करे न मन से काम कहैं कबीर सेवक नहीं, कहैं चौगुना दाम संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: Blogroll, धर्म, संस्कार, आध्यात्म, भारत, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, aducation

बस चलते रहो-आलेख 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे मित्रों ने  मेरे ब्लोग पर  एक वेब साईट से लिए गए अपने सभी ब्लोगों की कीमत के बारे में लिखी गयी … more →

Tags: Blogroll, writing, संपादकीय, अभिव्यक्ति, चिन्तन, सूचना, आलेख, हिंदी साहित्य, Urdu

संत कबीर वाणी:पढ़ कर पत्थर और लिख कर ईंट होते लोग

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कह … more →

Tags: Blogroll, dharam, aastha, inglish, आस्था, आध्यात्म, चिन्तन, साहित्य, हिंदी साहित्य

आम आदमी बैठा मुस्कराता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कोई हारता और कोई जीतता कोई कैसे बांचता और कोई कैसे सुनाता चुनाव का खेल ऐसा है लड़ने और लड़ाने वाले य … more →

Tags: arebic, Art, अनुभूति, कला, क्षणिका, दीपक भारतदीप, भारत, व्यंग्य चिंतन, शायरी


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