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Blogs about: शिक्षा

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आज भी प्रभावी मैकॉले की ब्रिटिश शिक्षा नीति: "We must do our best to form a class ... "2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 4 days ago: अपने देश, इंडिया दैट इज भारत, (and ironically India is actually not Bharat) की भेदभावपूर्ण तथा दोहरी … more →

Tags: भारत, Education, India, भारत में ब्रिटिश राज, मैकॉले शिक्षा नीति, British Rule in India, Macaulay's Education Policy

नाट वन लेस

Hemant Patel wrote 3 weeks ago: इंडिया और चाइना मे कम से कम एक सम्स्या तो आम हॆ – ग्रामीण और शहरी जीवन की असमानता. इसकी एक बेहतरीन झ … more →

Tags: म्स्ट वाच फ़िल्म, सिनेमा, गांव, चायना, झेंग यिमु, नाट वन लेस, स्कूल

संकट में है शिक्षक, शिक्षक नामक जंतु व शिक्षक प्रजाति बचेगी या नहीं ? - सुनील -3 comments

अफ़लातून wrote 2 months ago: शिक्षक दिवस, 5 सितंबर के अवसर पर भारतीय संस्कृति में गुरु को बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा गया है, उ … more →

Tags: common school system, Education Bill, Teachers, शिक्षक दिवस, शिक्षकों की हालत, crisis of the teachers, teachers day

नींद से जागो

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: नींद से जागो सूली चढ़कर शहीद भगत ने दुनिया को ललकारा है, नींद से जागो ऐ मज़लूमों सारा देश तुम्हारा ह … more →

Tags: आह्वान, क्रांति, भगत सिंह, मजदूर, ललकार, समाजवाद, सर्वहारा, हिन्दी साहित्य, शोषण-उत्पीड़न

जिज्ञासु बालक5 comments

Nishant wrote 7 months ago: छः साल के बालक अल्बर्ट आइंस्टाइन को जर्मनी के म्यूनिख शहर के सबसे अच्छे स्कूल में भरती किया गया। इन … more →

Tags: वैज्ञानिक, आइंस्टीन

आस्तिक, नास्तिक और स्वास्तिक- (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: सच बात तो यह है कि दुनियां विश्वास के आधार पर तीन भागों में बंटी हुई हैं-आस्तिक,नास्तिक और स्वास्तिक … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, साहित्य, हंसना, हास्य व्यंग्य, हिंदी, हिंदी साहित्य, हिन्दी

रिसर्च1 comment

Nishant wrote 8 months ago: बहुत साल पहले विश्वप्रसिद्ध जॉन्स होपकिंस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने वरिष्ठ विद्यार्थियों को यह प् … more →

Tags: अन्य कथाएँ

दिल्ली मेट्रो की चकाचौंध के पीछे की काली सच्चाई[audio]

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: ट्रेनों और स्टेशनों को चमकदार बनाए रखने वाले १४०० सफाई कर्मियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं, ठेकेदरों … more →

Tags: नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, सर्वहारा, अनुभव, मजदूर का ऑडियो अख़बा, मजदूरों का जीवन

मेरा बाल्यकाल और कुमारावस्था1 comment

डा. अमर कुमार wrote 10 months ago: अबतक आपने पढ़ा … औ्षधि तीन प्रकार की होती है  1- दैविक, 2- मानुषिक, 3- पैशाचिक । पैशाचिक औषधियों … more →

Tags: आत्म-चरित, आत्मकथा, खण्ड-1, अंगरेजी, , उद्दण्ड, कन्यायें, गाय, ग्वालियर

देश की राजधानी की शिक्षा व्यवस्था : एक अनुभव

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 12 months ago: लाल सवेरे का मुंह चूमो शिक्षा हर इन्सान की बुनियादी जरूरत है, चाहे वह मजदूर हो या किसान. सरकार कहती … more →

Tags: बिगुल, मजदूर, सर्वहारा, अनुभव

हिन्दीः कुछ निजी अनुभव

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: दो दशक से अधिक का समय बीत चुका है जब मुझे इस बात का एहसास पहली बार हुआ कि अपनी मौलिक भाषाओं के प्रति … more →

Tags: अंग्रेजी, देश, राजभाषा, हिन्दी, अध्यापन, अनुभव

शिक्षक दिवस वीतने पर 1 comment

माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: कल ५ सितम्बर था, शिक्षक दिवस था आज भी शिक्षको को उतना ही महत्व दिया जाता है लेकिन अब आज के शिक्षक न … more →

Tags: अवसर विशेष, शिक्षक, शिक्षक दिवस

विभिन्न समाजों का पुराने ढर्रे पर चलना अब कठिन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना, अनुभूति, आलेख

रेल की बोगी में ज्ञान की किताबें बेच सकते हैं, ज्ञान नहीं-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वृंदावन की यात्रा कर हम दोनों पति-पत्नी दोनों ही खुश होते हैं। इस बार जब हम दोनों वहां पहुंचे तो बरस … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भाषा, मस्तराम

शेर के इंतजार में उम्र न निकल जाये-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पार्क में घूमती हुई लड़कियों को उस लड़के ने छेड़ा ‘हम तुम इक कमरे में बंद हों और शेर आ जाये उससे कहू … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, vyangya, inglish, शायरी, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, Shayri

पेट में खाया कौन देखता है-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: समाज के नाम पर सभी पुरानें रीतिरिवाजों को लोग इसलिये अपनाये हुए है कि उसमे अगर उनका कभी खर्च होता है … more →

Tags: writing, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, चिन्तन, भारत, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, Urdu

यूनिकोड से कृतिदेव की तरफ जाते हुए-आलेख6 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब मैं कैसे लिख रहा हूं या पहले कैसे लिखता था उसके अच्छे-बुरे को निर्णय करने का जिम्मा तो मैं कभी भी … more →

Tags: Blogroll, writing, संपादकीय, चिन्तन, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, Internet, Urdu

Open Source Software Education in India

oskanpur wrote 1 year ago: भारत मे सार्वजनिक वित्त पर चलने वाली शिक्षण सँसथाएं व खुला सोर्स कोड / लाइनक्स उबुँटू शिक्षा – … more →

Tags: उबुँटू, किसकी, कोड, खुला, चलने, जिम्मेदारी, पर, भारत, मे

संत कबीर वाणी:सेवा के बदले दाम मांगे वह सेवक नहीं 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फल कारण सेवा करे, करे न मन से काम कहैं कबीर सेवक नहीं, कहैं चौगुना दाम संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: Blogroll, धर्म, संस्कार, आध्यात्म, भारत, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, aducation


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