(प्यारे शिशुओं को समर्पित) राजहठ और नारी हठ तो दर्द देता हर कहीं बालहठ को प्यार में हरगीज भूला सकते नहीं राजहठ चमड़े का सिक्का चल गया इस देश में नारी हठ क्या गुल खिलाये स्वर्णमृग हो वेश में बालहठ ने… more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: (प्यारे शिशुओं को समर्पित) राजहठ और नारी हठ तो दर्द देता हर कहीं बालहठ को प्यार में हरगीज भूला सकत … more →
Tags: तुकान्त, बालहठ
Follow this tag via RSS