Blogs about: शेर ओ शायरी

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जिंदा रहने के बहाने तलाशता आदमी-हिंदी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: एक बच्चे के पैदा होने पर घर में खुशी का माहौल छा जाता है भागते हैं घर के सदस्य इधर-उधर जैसी कोई आसमा … more →

Tags: विचार, व्यंग्य, शायरी, शेर, सन्देश, साहित्य, हास्य, हिन्दी पत्रिका, bharat

इस तरह वह शादी न हो सकी-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मंडप में पहुंचने से पहले ही दूल्हे ने दहेज़ में मोटर साइकल देने की माँग उठाई उसके पिता ने दुल्हन के … more →

Tags: abhivyakti, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लेखक, व्यंग्य, शायरी, शेर

काले सौदे पर भी सफेद होने के प्रमाण होते-हास्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: घर भरा है समंदर की तरह दुनियां भर की चीजों से नहीं है घर मे पांव रखने की जगह फिर भी इंसान बेचैन है … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, हास्य, सन्देश, शायरी, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya

प्यार का पहला शब्द कहना सीख ले-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपने मन में है बस व्यापार बाहर ढूंढते हैं प्यार मन में ख्वाहिश सोने, चांदी और धन के हों भण्डार पर दू … more →

Tags: Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, रचना

कहने वाले का कहना ही है व्यापार-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: एक सपना लेकर सभी लोग आते हैं सामने दूर कहीं दिखाते हैं सोने-चांदी से बना सिंहासन कहते हैं ‘तुम उस पर … more →

Tags: abhivyakti, alekh, arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, चिंतन, दीपक भारतदीप, दोहे

श्रमिक पुत्र कभी अभिनेता नहीं बनता-हास्य कविता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज मजदूर दिवस है आओ सब मिलकर नारे लगायें जो गरीबों और मजदूरों को भायें जन कल्याण और न्याय के लिये ज … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, hindi, jagran, abhivyakti, Internet, Kavita, Friends, Anubhuti

आँखें उनको देखने को तरस जाती हैं-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: मेरी नाव डुबोने वाले बहुत हैं पर उनकी याद कभी नहीं आती मझधार में भंवर के बीच आकर जो किनारे तक पहुंचा … more →

Tags: आलेख, darshan, bharat, India, व्यंग्य, hasya, हास्य, सन्देश, विचार

विषयों के पहाड़ खोदने से क्या फायदा-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अब तो मुद्दे जमीन पर नहीं बनते हवा में लहराये जाते राई से विषय पहाड़ बताये जाते मसले अंदर कमरे में … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, bharat, India, कविता, Kavita, सन्देश, साहित्य, अनुभूति

मानते नहीं तो फिर पत्थर क्यों उड़ाते-कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते हैं पत्थर के बुतों में भगवान नहीं मानेंगे पर भगवान के बुत उड़ाने पहुंच जाते जवाब नहीं देना इसल … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, व्यंग्य चिंतन, शायरी, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, भारत

कभी उजड़ता तो कभी महकता है चमन-कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको देखने के लिय मचलता है मन अगर वह पास आते हैं तो हो जाता है अमन बातें होतीं हैं प्यारी कभी होती … more →

Tags: Blogroll, Kavita, inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, शेर, अनुभूति, संवेदना

भीड़ से अलग पहचान के लिए अकेले हो जाते- व्यंग्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी अलग पहचान के लिये भीड़ से अलग होना ही पड़ता है जब चुनते हैं अपनी अलग राह छोड़नी पड़ती है साथी … more →

Tags: vews, inglish, sher-o-shayree, कविता, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

पास के विद्वान भी बैल बन जाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू मैं हीरो का ब्लाग पढ़कर आया हिंदी तो ढंग से पढ़ना नहीं आती पर उसका अ … more →

Tags: Kavita, Global Dashboard, inglish, शायरी, हास्य व्यंग्य, India, bharat, शेर, साहित्य

फिर कभी मोबाइल नहीं होगा खराब-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सारा दिन कान से मोबाइल चिपका कर प्रेम की बातें करने वाले प्रेमी के कान हो गये  खराब कभी आवाज आती तो … more →

Tags: कविता, inglish, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, भारत, India, शेर

पसीना ही कविता लिखवाता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बदलते मौसम के साथ मन भी यूं बदल जाता है जैसे उसके साथ बंधे हों हाथ ग्रीष्म के जलती दोपहर में व्यग्रत … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, चरित्र, दीपक भारतदीप, दृश्य, मस्तराम, व्यंग्य कविता, शायरी

सादगी से कही बात किसी के समझ में नहीं आती-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: हिन्दी, Internet, bharat, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, कविता, arebic, web dunia

बाज़ार में बिकती है दवा और अमृत-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: चिंतन, Internet, Anubhuti, सन्देश, शायरी, शब्द, साहित्य, दीपक भारतदीप, arebic

आजाद होकर भी गुलाम खड़े मालिकों की कृपा के इंतजार में -हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: परदेस में पुजने से ही देश में भगवान बनेंगे कैसा यह उनका भ्रम है। देश के लोगों से मिले मान से क्या गौ … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, Friends, सन्देश, अनुभूति, साहित्य, Deepak bharatdeep

रौशनी ने भी अपने रूप बदले हैं-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: निकले थे अंधेरे में माटी के चिराग ढूंढने पर कांच के बल्ब के टुकड़े लग गये पांव में रौशनी ने भी अपने … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Enternment

फरेबी भी बदनाम होकर नाम तो पा जाते हैं-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अपनी काबलियत पर न इतना इतराओ इनाम यहां यूं ही नहीं मिल जाते हैं भीख मांगने का भी होता है तरीका लूटने … more →

Tags: चिंतन, अभिव्यक्ति, abhivyakti, Internet, Friends, bharat, India, सन्देश, अनुभूति


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