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Blogs about: श्रम का मूल्य

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लक्ष्मी-पूजन करें लेकिन 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: जब भी हम बाजार से कोई वस्तु खरीदते हैं तो हम उसके भौतिक गुणों की ओर ही देखते हैं. हो सकता है हम उसके … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, दायित्वबोध, विचारणीय : मीडिया से, पण्यों की जड़ पूजा, श्रम-शक्ति

मैं कार्ल मार्क्स के अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत की इतनी सरल प्रस्तुति सुन रही थी...2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: जैक लंडन का उपन्यास - देखें : \’आयरन हील\’ और अतिरिक्त मूल्य का नियम सपने का गणित अर्नेस … more →

Tags: कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स

श्रम और पूंजी की टक्कर - एक ऐसा 'वैषम्य' जिसका निपटारा बल प्रयोग द्वारा ही होता है 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: श्री दिनेशराय द्विवेदी जी द्वारा लिखित आलेख ‘उद्यम भी श्रम ही है‘ और श्री ज्ञानदत्त जी प … more →

Tags: पुस्तकें, सर्वहारा, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, संघर्ष, युद्ध, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, Marxism

कांग्रेस की जीत…अफलातून और सुरेश चिपलूनकर… कुछ विशेष टिप्पणियों का सामान्य जवाब2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखे : “कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते म … more →

Tags: दायित्वबोध, प्रतिबद्ध, लेनिन, आह्वान, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन

"कांग्रेस की जीत पर अफलातून और सुरेश चिपलूनकर के दुःख में हम भी शरीक होते मगर …की टिप्पणियों के प्रत्युत्तर में5 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: इस पोस्ट से सम्बंधित प्राप्त टिप्पणियों के पश्चात् यह ज़रूरी हो गया है कि इस विषय पर वाद-विवाद जारी … more →

Tags: दायित्वबोध, प्रतिबद्ध, लेनिन, आह्वान, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन

इस युग का प्रधान वैषम्य : जनतन्तर कथा (34) की हिफाजित में 10 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 6 months ago: “कोट, कपड़ा, आदि उपयोग-मूल्य, अर्थात पण्यों के ढांचे, दो तत्त्वों के योग होते हैं – पदार् … more →

Tags: विचारणीय : मीडिया से, प्रतिबद्ध, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, Marxism

पूंजीवाद के खिलाफ मेहनतकश वर्ग के प्रतिरोध के विभिन्न रूप

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 23.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां पूंजीवादी समाज मेहनतकशों … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

मजदूर पूंजीपति को उधार देता है1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 21.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “ऐसे प्रत्येक देश म … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

स्त्रियों और बच्चों का श्रम 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 20. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “जिस हद तक मशीनें शा … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, बाल श्रम, एंगेल्स, पूँजी, मजदूर वर्ग की विरासत, Capital, कम्युनिस्ट पार्टी क, वर्ग चेतना

श्रम और श्रमशक्ति

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 7 months ago: 18. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां यहाँ पर मार्क्स और एंगेल्स … more →

Tags: सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, बाल श्रम, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, Marxism, एंगेल्स

लाभकारी मूल्य..लागत मूल्य : एक बहस

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: लाभकारी मूल्य, लागत मूल्य, मध्यम किसान और छोटे पैमाने के माल-उत्पादन के बारे में मार्क्सवादी दृष्टिक … more →

Tags: विचारणीय : मीडिया से, बिगुल, लेनिन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, मार्क्सवाद, वर्ग चेतना, मजदूरों का अख़बार, bigul

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-5. औद्योगिक क्रांति और मशीन से उत्पादन का विकास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: 5. औद्योगिक क्रांति और मशीन से उत्पादन का विकास अठारहवीं शताब्दी के अंत में नयी मशीनों के आविष्कार स … more →

Tags: क्रांति, पुस्तकें, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-4. मैन्युफैक्चर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: ['कम्यूनिस्ट घोषणापत्र' पर राजनीतिशास्त्र के कई विद्वानों ने व्याख्याएँ और टिप्पणियां लिखी हैं. इनमे … more →

Tags: क्रांति, पुस्तकें, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-3. मध्ययुगीन अर्थव्यवस्था का ह्नास, भूगोलिक खोजों का युग और विश्व-बाज़ार की शुरुआत

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: 3. मध्ययुगीन अर्थव्यवस्था का ह्नास, भूगोलिक खोजों का युग और विश्व-बाज़ार की शुरुआत पंद्रहवीं शताब्दी … more →

Tags: पुस्तकें, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

तनख्वाह का सच

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 10 months ago: आपस की बात मजदूर भाइयो, मैं अभी कुछ दिनों से ही फैक्ट्री में काम करने लगा हूँ, किंतु इतने में ही मैं … more →

Tags: विचारणीय : मीडिया से, क्रांति, ललकार, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, मार्क्सवाद, संघर्ष


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