तीनों लोकों में राधा की स्तुति से देवर्षि नारद खीझ गए थे। उनकी शिकायत थी कि वह तो कृष्ण से अथाह प्रेम करते हैं फिर उनका नाम कोई क्यों नहीं लेता, हर भक्त ‘राधे-राधे’ क्यों करता रहता है। वह … more →
यह भी खूब रहीpryas wrote 2 months ago: तीनों लोकों में राधा की स्तुति से देवर्षि नारद खीझ गए थे। उनकी शिकायत थी कि वह तो कृष्ण से अथाह प्रे … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: यह एक टिप्पणी जो उस ब्लाग पर नहीं रखी जा सकी जिसमें श्रीगीता के युद्ध की चर्चा करते हुए उस ब्लाग लेख … more →
aspundir wrote 1 year ago: पति-स्तवनम् नमः कान्ताय सद्-भर्त्रे, शिरशछत्र-स्वरुपिणे। नमो यावत् सौख्यदाय, सर्व-सेव-मयाय च।। नमो ब … more →
pryas wrote 1 year ago: एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया कि वही भगवान के सबसे बड़े भक्त हैं। उनकी इस भावना को श्रीकृष्ण ने समझ … more →