अजीब लगता है धर्म विषयक उन बहसों से एक आम व्यक्ति के रूप में जुड़कर जो समय समय पर प्रचारतंत्र में सुनने और देखने को मिलती है। इन बहसों के निष्कर्ष हमेशा ही शून्य रहते हैं। धर्म का आधार ज्ञान होता है और… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अजीब लगता है धर्म विषयक उन बहसों से एक आम व्यक्ति के रूप में जुड़कर जो समय समय पर प्रचारतंत्र में सुन … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कभी समलैंगिकता तो कभी सच का सामना, युवक युवतियों के बिना विवाह साथ रहने और इंटरनेट पर यौन सामग्री से … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः। विषादी दीर्घसूत्रीच कर्ता तामस उच्यते।। हिंदी में भावार … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अक्सर यह सुनने को मिलता है कि ‘महाभारत घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे क्लेश होता है’। हो सकता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: यह कोई आग्रह नहीं है यह कोई चेतावनी भी नहीं है। यह कोई फतवा भी नहीं है और न ही यह अपने विचार को किसी … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: ज्ञान किसी समाज की संपत्ति नहीं होता-आलेख इस बार गुडफ्राइडे के अवसर पर वैटिकन सिटी में आयोजित एक प्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि ———————— तारा मण् … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: इस बार गुडफ्राइडे के अवसर पर वैटिकन सिटी में आयोजित एक प्रार्थना में हिन्दू धर्म के महान ग्रंथ श्रीग … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः।। नीति विशारद चाणक्य कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: एक बात निश्चित है कि धर्म नितांत एक निजी विषय है और उस पर सार्वजनिक विषय पर चर्चा करना केवल एक दिखाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बहुत मुश्किल हो गया। अंतर्जाल पर ब्लाग पर ऐसी कठिनाई आयेगी यह कभी नहीं सोचा था। मैं कंप्यूटर पर बैठत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: धर्म को लेकर अब अधिक चर्चा हो रही है पर उसके मूल तत्वों के बारे में कम उससे मानने वाले लोगों के आचरण … more →