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Blogs about: श्री हरिराय जी

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हों वारी इन वल्लभीयन पर।

pushtimarg wrote 2 years ago: हों वारी इन वल्लभीयन पर। मेरे तन कौ करौं बिछौना, सीस धरो इनके चरनन पर। भावभरी देखो इन अँखियन, मंडल म … more →

Tags: विविध

नैन भरि देखि अब भानु तनया

pushtimarg wrote 3 years ago: नैन भरि देखि अब भानु तनया । केलि पिय सों करें भ्रमर तबहि परें, श्रम जल भरत आनंद मनया ॥१॥ चलत टेढी हो … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग रामकली

कहत श्रुतिसार निर्धार करिकें

pushtimarg wrote 3 years ago: कहत श्रुतिसार निर्धार करिकें । इन बिना कौन ऐसी करे हे सखी, हरत दुख द्वन्द सुखकंद बरखें ॥१॥ ब्रह्मसंब … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग रामकली

श्याम सुखधाम जहाँ नाम इनके

pushtimarg wrote 3 years ago: श्याम सुखधाम जहाँ नाम इनके । निशदिना प्राणपति आय हिय में बसे, जोई गावे सुजश भाग्य तिनके ॥१॥ येही जग … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग रामकली

पिय संग रंग भरि करि किलोलें

pushtimarg wrote 3 years ago: पिय संग रंग भरि करि किलोलें । सबन कों सुख देन पिय संग करत सेन,चित्त में परत चेन जब हीं बोलें ॥१॥ अति … more →

Tags: यमुना जी के ४१ पद, राग रामकली


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