हों वारी इन वल्लभीयन पर। मेरे तन कौ करौं बिछौना, सीस धरो इनके चरनन पर। भावभरी देखो इन अँखियन, मंडल मध्य विराजत गिरिधर । वे तो मेरे प्राण-जीवन-धन दान दिए रे श्री वल्लभ वर ॥ पुष्टीमार्ग प्रकट करिबें कौ … more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: हों वारी इन वल्लभीयन पर। मेरे तन कौ करौं बिछौना, सीस धरो इनके चरनन पर। भावभरी देखो इन अँखियन, मंडल म … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: नैन भरि देखि अब भानु तनया । केलि पिय सों करें भ्रमर तबहि परें, श्रम जल भरत आनंद मनया ॥१॥ चलत टेढी हो … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: कहत श्रुतिसार निर्धार करिकें । इन बिना कौन ऐसी करे हे सखी, हरत दुख द्वन्द सुखकंद बरखें ॥१॥ ब्रह्मसंब … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्याम सुखधाम जहाँ नाम इनके । निशदिना प्राणपति आय हिय में बसे, जोई गावे सुजश भाग्य तिनके ॥१॥ येही जग … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: पिय संग रंग भरि करि किलोलें । सबन कों सुख देन पिय संग करत सेन,चित्त में परत चेन जब हीं बोलें ॥१॥ अति … more →