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Blogs about: संग

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कविता-बसंत रै संग आयो फागण

विजय सारस्वत wrote 8 months ago: कविता-बसंत रै संग आयो फागण बसंत रै संग आयो फागण प्रेम री राग रंगीली बसंत रै संग, खुशी बांटण चाल्यो आ … more →

Tags: 1, कविता, बसंत, फागण

गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है7 comments

विनय wrote 11 months ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →

Tags: मेरा गीत, Arms, अंग, इरादा, गुलाबी, गोरी, चाहत, तीरे-नज़र, दीवाना

जब कभी वह शाम 1 comment

विनय wrote 1 year ago: जब कभी वह शाम मुझे याद आयी मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी माना आज शाम का वह रंग नहीं और मेरी जान त … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, रंग, इश्क़, Heart, Love, जुदा, दिल, प्यार

यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है

विनय wrote 1 year ago: यह ज़िन्दगी मेरी एक पतंग है मैं जिसको चाहता हूँ वह मुझसे बेरंग है उड़ती है बिल्कुल अकेली ढ़ूढ़ती है क … more →

Tags: मेरी नज़्म, ज़िन्दगी, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, Solitude, loneliness, पतंग

जीवन की पहली धूम

विनय wrote 1 year ago: जब साँसों में समायी नयी सुगन्ध जब मिले पत्तों को लाल-हरे रंग जब आया जीवन में मेरे बसंत जब तन-मन में … more →

Tags: मेरा गीत, रंग, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, फूल, बारिश, सुबह

तू संग न होगा

विनय wrote 1 year ago: तू कर यह वादा भी मेरे अल्लाह तू संग न होगा तू है भी अगर किसी बुते-संग में तू संग न होगा तेरी मर्ज़ी स … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, प्यार, क़िस्मत, मुक़ाम, मोहब्बत, वफ़ा, तन्हा

इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं

विनय wrote 1 year ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Blame, प्यार, मोहब्बत, नज़र, इम्तिहाँ, Cruelty

कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से

विनय wrote 2 years ago: तह पर तह लगी है कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से आँधियों में… मैं खड़ा रहा साथ उसके न उसने मुझको द … more →

Tags: मेरी नज़्म, वक़्त, शिकन, time, चेहरा, आँधी, धूल, अजनबी, सिलसिला


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