Blogs about: संघर्ष

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सर्वहारा आन्दोलन के अंतरराष्ट्रीय चरित्र का विकास और क्रांति 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 week ago: 30.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “वर्ग विरोध पर आधा … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कम्युनिस्ट, क्रांति, पूंजीवादी संकट, युद्ध, सर्वहारा, इन्कलाब, कम्युनिस्ट पार्टी क

सर्वहारा वर्ग, "जन-साधारण" और किसान वर्ग - शोषण के रूपों का महत्त्व1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 week ago: 28.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां सर्वहारा वर्ग के शोषण का … more →

Tags: आंदोलन, सर्वहारा, मार्क्सवाद, फासिज्म, विरासत, एंगेल्स

बुर्जुआ समाज के अंतरविरोध और सर्वहारा द्वारा इनका उपयोग2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 weeks ago: 27.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां बुर्जुआ वर्ग की कतारों क … more →

Tags: आंदोलन, मार्क्सवाद, विरासत, सर्वहारा, कम्युनिस्ट पार्टी क, कार्ल मार्क्स, डेविड रियाज़ानोव, मजदूर वर्ग की विरासत, वर्ग चेतना

श्रम और पूंजी की टक्कर - एक ऐसा 'वैषम्य' जिसका निपटारा बल प्रयोग द्वारा ही होता है 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: श्री दिनेशराय द्विवेदी जी द्वारा लिखित आलेख ‘उद्यम भी श्रम ही है‘ और श्री ज्ञानदत्त जी … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, पुस्तकें, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, युद्ध, सर्वहारा, Marxism, कार्ल मार्क्स

दलित-प्रश्न और स्त्री-प्रश्न पर सही रुख अपनाओ!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: समाजवाद, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, Marxism, कविता, उदारीकरण, जीवन, वर्ग चेतना

वामपन्थी" कलावाद-रूपवाद और मध्यवर्गीय लम्पटता का विरोध करो!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: कविता, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, इन्कलाब, कला, मध्यवर्गीय लम्पटता, वामपन्थी, संस्कृति, समाज और संस्कृति

नए सांस्कृतिक कार्यभारों की ज़मीन--- महत्तव्पूर्ण सामजिक-आर्थिक सरंचनागत परिवर्तनों और विश्व-ऐतिहासिक विपर्यय का यह दौर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: एक नए सर्वहारा पुनर्जागरण और प्रबोधन के वैचारिक सांस्कृतिक कार्यभार (सांस्कृतिक मोर्चे पर नई शुरुआत … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, पूंजीवादी संकट

नई समाजवादी क्रान्ति का उद्घोषक 'बिगुल' के मई-2009 अंक की विषय - सामग्री2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: मज़दूर वर्ग के लिए सबसे बुरी बातों में से एक शायद यह है कि मई दिवस को आज एक अनुष्ठान बना दिया गया है … more →

Tags: आंदोलन, उदारीकरण, एंगेल्स, कविता, बाल श्रम, बिगुल, भगत सिंह, सर्वहारा, alteranative media

मई दिवस का इतिहास-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: इस पोस्ट का पहला भाग ….यहाँ देखें शिकागो की हड़ताल और हे मार्केट की घटना पहली मई को शिकागो में … more →

Tags: लेनिन, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, फासिज्म, युद्ध, विरासत

मई दिवस का इतिहास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: अलेक्जेण्डर ट्रैक्टनबर्ग अनुवाद : अभिनव सिन्हा मई दिवस का जन्म काम के घण्टे कम करने के आन्दोलन से … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, युद्ध, विरासत, सर्वहारा

मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: मई 1886 का वह रक्तरंजित दिन जब मज़दूरों के बहते ख़ून से जन्मा लाल झण्डा मज़दूरों का त्योहार मई दिवस आठ … more →

Tags: आह्वान, कम्युनिस्ट, बिगुल, मजदूर, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, सर्वहारा, पूँजीपति वर्ग के वफा, मई दिवस

मई दिवस

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: यह किस्सा नहीं किताबों का यह खेल नहीं दस्तूरों का, एक मई इतिहास बना है दुनिया के मज़दूरों का। एक मई … more →

Tags: कविता, विरासत, सर्वहारा, जीवन, वर्ग चेतना, सर्वहारा का संगीत

मेट्रो कर्मचारियों का आन्दोलन

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: दमन-उत्पीड़न से नहीं कुचला जा सकता मेट्रो कर्मचारियों का आन्दोलन दिल्ली मेट्रो की ट्रेनें, मॉल और दफ् … more →

Tags: आंदोलन, चर्चा है कि, बिगुल, मजदूर, शोषण-उत्पीड़न, श्रमशक्ति, सर्वहारा, बेरोजगारी, मजदूरों का जीवन

पाँच क्रान्तिकारी जनसंगठनों का साझा चुनावी भण्डाफोड़ अभियान

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: चुनावी राजनीति के मायाजाल से बाहर आओ! नये मज़दूर इन्कलाब की अलख जगाओ!! देशभर में लोकसभा चुनाव के लि … more →

Tags: बिगुल, क्रांति, आह्वान, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, फासिज्म, साम्राज्यवाद, काले कानून

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक-2

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: निकट अतीत की पृष्ठभूमि : नक्सलबाड़ी-पूर्व दो दशकों के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन नक्सलबाड़ी में … more →

Tags: आंदोलन, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, उदारीकरण, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद

नक्सलबाड़ी और उत्तरवर्ती चार दशक-1

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: एक सिंहावलोकन -दीपायन बोस कुछ चीज़ें धकेल दी गयी हैं अँधेरे में उन्हें बाहर लाना है, जड़ों तक जाना ह … more →

Tags: लेनिन, क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! ..अंतिम किश्त

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: उपरोक्त संक्षिप्त चर्चा के आलोक में मज़दूर साथियों के लिए यह समझना कठिन नहीं होना चाहिए कि मई दिवस … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, लेनिन

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! ...दूसरी किश्त

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: इस पोस्ट की प्रथम किश्त ..मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है! आम मज़दूर साथि … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, समाजवाद

मई दिवस अनुष्ठान नहीं, संकल्पों को फौलादी बनाने का दिन है!

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: एक बार फ़िर मुक्ति का परचम उठाओ! पूँजी की बर्बर सत्ता के खिलाफ़ फैसलाकुन लड़ाई की तैयारी में जुट जाओ! … more →

Tags: आंदोलन, कम्युनिस्ट, क्रांति, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, बिगुल, मजदूर, मार्क्सवाद, सर्वहारा


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